नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नया साल 2026 दस्तक देने को तैयार है, लेकिन बीत रहा वर्ष 2025 निवेशकों के लिए एक अभूतपूर्व कहानी लिख गया। यह वह साल रहा जब निवेशकों ने सेफ-हेवेन (सुरक्षित ठिकाना) कहे जाने वाले सोने (Gold) और चांदी (Silver) से छप्परफाड़ कमाई की, जबकि शेयर बाजार के दिग्गज सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) ने अपने निवेशकों को मायूस कर दिया।
चांदी ने रचा इतिहास, सोना भी चमका
साल 2025 की सबसे चौंकाने वाली चाल चांदी की रही। इस कीमती धातु ने रिटर्न देने के मामले में न सिर्फ शेयर बाजार को पछाड़ा, बल्कि खुद सोने को भी पीछे छोड़ दिया। वैश्विक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग के चलते, चांदी ने अब तक निवेशकों को 107% का बंपर रिटर्न दिया है, जिसके साथ इसकी कीमत ₹1,80,900 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) पर पहुँच गई है। वहीं, सोना भी 68% के दमदार रिटर्न के साथ ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के करीब कारोबार कर रहा है।
अवधि चांदी का तूफानी रिटर्न
1 साल 97.83%
6 महीने 77.73%
3 महीने 44.91%
शेयर बाजार की सुस्ती, निवेशक हुए निराश
बुलियन मार्केट के विपरीत, भारतीय शेयर बाजार ने पूरे साल संघर्ष किया। सेंसेक्स और निफ्टी 50 का रिटर्न मामूली 5% से 6% के आसपास रहा, जो महंगाई और अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में बहुत कम है। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को भी बड़ा झटका लगा, रिपोर्ट के मुताबिक 41 में से केवल 3 फंड ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए। इससे यह साफ हो गया कि कम जोखिम चाहने वाले निवेशकों के लिए इस साल इक्विटी बाजार आकर्षक नहीं रहा।
ETF ने भी कराया मालामाल
गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में निवेश करने वालों के लिए भी यह साल सोने जैसा साबित हुआ। सिल्वर ईटीएफ ने तो रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया, जिसमें UTI Silver ETF (100.89%) और ICICI Prudential Silver ETF (100.72%) ने 100% से अधिक का रिटर्न दिया। वहीं, गोल्ड ईटीएफ ने भी एक साल में करीब 60% का शानदार रिटर्न दर्ज किया।
तेज़ी के पीछे की वजहें: ग्लोबल टेंशन और डॉलर की कमजोरी
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने-चांदी की इस ऐतिहासिक तेज़ी के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव। निवेशकों का रुझान जोखिम भरे एसेट्स से हटकर सुरक्षित विकल्प जैसे सोने-चांदी की ओर मुड़ा।
मुद्रास्फीति और डॉलर की कमजोरी: गिरते डॉलर और बढ़ती मुद्रास्फीति ने बुलियन को मजबूत सपोर्ट दिया।
औद्योगिक मांग
चांदी की औद्योगिक खपत में तेज़ी ने इसकी मांग और कीमतों को बढ़ाया। एक चर्चित अखबार से बात करते हुए एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी ने बताया कि, मजबूत ग्लोबल ट्रेंड और भारतीय करेंसी (रुपये) की कमजोरी ने घरेलू बाजार में सोने की बढ़त को बढ़ाया। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित 25 बेसिस पॉइंट रेट कट की उम्मीदों ने भी बुलियन को ऐतिहासिक समर्थन दिया।
निवेशकों के लिए स्पष्ट सबक: विविधीकरण है जरूरी
वर्ष 2025 ने निवेशकों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल शेयरों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अस्थिर बाजार में संतुलन बनाए रखने, और महंगाई से सुरक्षा पाने के लिए विविध निवेश (Diversification) अनिवार्य है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी, गोल्ड, और सिल्वर का उचित मिश्रण रखना चाहिए ताकि वे बाजार के हर मूड से मुनाफा कमा सकें।





