नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को बड़ा झटका देते हुए, भारत सरकार के टेकडाउन आदेशों के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है जहां अदालत ने स्पष्ट किया कि, भारत में काम करने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को भारतीय कानूनों का पालन करना ही होगा। इसमें कोर्ट ने कहा कि ट्विटर अमेरिका में कानूनों का पालन करता है, लेकिन भारत में वही नियम लागू करने से इनकार कर रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने दो टूक कहा, हर प्लेटफॉर्म जो भारत में संचालन करता है, उसे यहां के कानूनों और नियमों से परिचित होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर निगरानी जरूरी: कोर्ट
बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को “बिना नियंत्रण” के काम करने की छूट नहीं दी जा सकती। यह मौजूदा समय की एक बड़ी आवश्यकता है कि डिजिटल स्पेस में नियमन हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 सिर्फ नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, विदेशी कंपनियों को नहीं।
‘भारत, अमेरिका नहीं है’ अदालत का स्पष्ट संदेश
कोर्ट ने ट्विटर की उस दलील को भी खारिज कर दिया, जिसमें अमेरिकी न्यायशास्त्र और फ्री स्पीच के अधिकार की बात की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा, भारत का संविधान और कानून अलग हैं, यहां अमेरिकी मॉडल लागू नहीं हो सकता।
IT नियमों की नई व्याख्या जरूरी
अदालत ने कहा कि डिजिटल युग में एल्गोरिदम जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित कर रहे हैं, ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि 2021 के IT नियमों को नए नजरिए से व्याख्यायित किया जाए। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि 2011 के श्रेया सिंघल फैसले और 2021 के नियमों के बीच अंतर है और दोनों को एक नजर से नहीं देखा जा सकता। भारतीय बाजार किसी का खेल का मैदान नहीं है। तकनीक के साथ नियमन भी विकसित होना चाहिए। कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
पिछले दिनों की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने 2021 में आईटी नियम लागू किए, जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए शिकायत निवारण प्रणाली, टेकडाउन आदेश मानने, और सरकारी एजेंसियों से सहयोग देने की शर्तें रखी गईं।
कई कंपनियों ने इन नियमों को चुनौती दी
कई कंपनियों ने इन नियमों को चुनौती दी, जिससे मामला अदालतों में पहुंचा।कर्नाटक हाईकोर्ट ने अब साफ कर दिया कि विदेशी प्लेटफॉर्म भारत में काम करना चाहते हैं तो उन्हें यहां के कानूनों का सम्मान करना होगा। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रण के दायरे में लाने के लिए सरकार का यह कदम उचित है। वहीं, आलोचक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने की कोशिश भी मान रहे हैं।
निगरानी का संतुलन जरूरी
कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि भारत में सोशल मीडिया को खुले हाथ नहीं दिया जाएगा। इसके लिए उचित नियमन और कानूनी बाध्यता जरूरी होगी ताकि साइबर अपराध, फेक न्यूज और डिजिटल आक्रमणों को रोका जा सके।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत में कानून से ऊपर कोई नहीं। सोशल मीडिया की आज़ादी की हदें देश के कानून तय करेंगे, न कि विदेशी मॉडल।





