नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। गुरुवार को थोक महंगाई दर ने पिछले 42 महीने के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। अप्रैल में 8.3 प्रतिशत पर पहुंची थोक महंगाई दर। यही कारण है कि देश में Petrol Diesel Price को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने पिछले 48 घंटों में कई बड़े फैसले लिए हैं। इन फैसलों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कीमत बढ़ाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
48 घंटे में लिए गए 3 बड़े फैसले
सरकार ने सबसे पहले ईंधन बचाने को लेकर लोगों से अपील तेज कर दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की बात कही है। इसके अलावा सरकार ने चीनी निर्यात पर रोक लगाने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कई आर्थिक कदम उठाए हैं। वहीं CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मुंबई में MGL ने CNG के दाम 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए हैं। इन फैसलों को बढ़ते ईंधन संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भारी नुकसान झेल रही हैं। बताया जा रहा है कि कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखा गया है। सरकार फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन लंबे समय तक यह स्थिति बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है।
क्या सच में बढ़ेंगे Petrol Diesel Price?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है और सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अभी कीमतों को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में हालात के अनुसार बड़ा कदम उठाया जा सकता है।





