नई दिल्ली, रफ्तार। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्ज देने वाले बैंकों के साथ वित्तीय संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि जिन संस्थानों ने भी गलत तरीके से अतिरिक्त ब्याज वसूला है, वे तुरंत ग्राहकों को लौटा दें। ये संस्थान ब्याज वसूलने में अनुचित तरीकों का सहारा ले रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है। आरबीआई ने सर्कुलर जारी कर कहा कि साल 2003 से विनियमित संस्थाओं (आरई) को समय-समय पर निर्देश दिए जाते हैं, जिनमें कर्ज मूल्य निर्धारण नीति पर निष्पक्षता और पारदर्शिता की बात होती है।
सिस्टम में बदलाव का निर्देश
31 मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए आरई की जांच में आरबीआई को ऋणदाताओं द्वारा ब्याज वसूलने में कुछ अनुचित प्रथाओं के उदाहरण प्राप्त हुए हैं। RBI ने प्रमुख रूप से निष्पक्षता और पारदर्शिता में अनुचित प्रथाओं पर चिंता जताई है। बैंक ने कहा कि सभी आरई कर्ज वितरण के तरीके, ब्याज के आवेदन एवं अन्य शुल्कों के संबंध में अपनी प्रथाओं की समीक्षा कर सिस्टम में बदलाव करें। साथ ही ब्याज वसूलने के नियमों में जरूरी सुधार करें।
कर्ज मंजूरी की तारीख से ब्याज लेना गलत
आरबीआई का कहना है कि ऑनसाइट जांच में पाया गया कि आरई ने कर्ज मंजूरी की तारीख या कर्ज समझौते की तारीख से ब्याज वसूला है। जबकि, ब्याज तब से वसूलना चाहिए, जब ग्राहक को लोन मिला हो।
चेक की तारीख से भी वसूल रहे थे ब्याज
आरबीआई ने कहा है कि ऐसे भी मामले आए हैं, जहां चेक की तारीख से ब्याज लिया गया। जबकि, ग्राहकों को चेक कई दिनों बाद मिला था। कुछ संस्थानों ने जिस महीने में कर्ज दिया था, उस महीने का पूरा ब्याज लिया। कुछ मामलों में ग्राहक से एक या कई किस्तें लोन देने के समय ले लिए, लेकिन ब्याज पूरे कर्ज पर लिया गया था। कुछ केस में कर्ज वितरण के लिए जारी किए चेक के बदले आरई को ऑनलाइन ट्रांसफर का उपयोग करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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