नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म WinZO पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में कड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने कंपनी के प्रमोटर पावन सिंह नंदा और सौम्या राठौर को गिरफ्तार किया है। साथ ही तलाशी में कंपनी से जुड़ी 505 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति को भी फ्रीज कर दिया गया है।
KYC का दुरुपयोग और धोखाधड़ी का आरोप
ED की जांच में सामने आया कि WinZO ने अपने कुछ यूजर्स की KYC जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। कई शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके खातों को बेवजह ब्लॉक कर दिया गया और PAN व अन्य पहचान दस्तावेज धोखे से इस्तेमाल किए गए।
एल्गोरिदम के जरिए यूजर्स को लगाया चूना?
जांच में यह भी पता चला कि खिलाड़ी यह सोचकर गेम खेल रहे थे कि वे असली इंसानों से मुकाबला कर रहे हैं, जबकि कई बार कंपनी उन्हें सॉफ्टवेयर/एल्गोरिदम के खिलाफ खेलने को मजबूर करती थी।
इससे खिलाड़ियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कंपनी ने अवैध रूप से कमाई की।
ग्राहकों के पैसे वापस नहीं किए
कंपनी ने वॉलेट में जमा पैसों की निकासी सीमित की हारे हुए दांव की रकम से अपराध आय अर्जित की सरकार द्वारा 22 अगस्त 2025 से रियल मनी गेम्स (RMGs) पर प्रतिबंध के बाद भी ₹43 करोड़ ग्राहकों को वापस नहीं किए गए ED के मुताबिक, WinZO ने भारत से ही ब्राजील, जर्मनी और अमेरिका में रियल मनी गेम्स चलाए। कंपनी ने USD 55 मिलियन (लगभग ₹490 करोड़) को विदेशी निवेश के नाम पर USA और सिंगापुर की शैल कंपनियों में ट्रांसफर किया। ये कंपनियां केवल कागज़ों में थीं, इनका संचालन भी भारत से ही किया जाता था।
बड़ी कार्रवाई के बाद क्या आगे?
ED की टीम अब पैसों के लेन-देन, विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों की गहराई से जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद WinZO ऐप व उससे जुड़े अधिकारियों पर और सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।





