नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । शेयर बाजार में सुरक्षित निवेश के लिए म्यूचुअल फंड सबसे लोकप्रिय विकल्प है। लाखों निवेशक इसे SIP के माध्यम से चुनते हैं, जिससे उन्हें सरकारी स्मॉल सेविंग स्कीम और फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न मिलता है। अब म्यूचुअल फंड में निवेश के नियम बदलने वाले हैं। सेबी ने इसके लिए नए दिशा-निर्देशों का प्रस्ताव रखा है, जो जल्द ही लागू हो सकते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य निवेशकों को और अधिक सुरक्षित और पारदर्शी निवेश का विकल्प प्रदान करना बताया जा रहा है।
सेबी का नया प्रस्ताव
मार्केट रेगुलेटर सेबी ने म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलने और शुरुआती निवेश को मानकीकृत करने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके तहत नए खाते केवल KYC (अपने ग्राहक को जानो) वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही खोले जा सकेंगे। फिलहाल कुछ मामलों में खाता केवाईसी पूरी होने से पहले ही खुल जाता है, जिससे निवेशकों और AMC (परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों) दोनों को परेशानी होती है। अधूरी या गलत केवाईसी जानकारी के कारण निवेशक ट्रांजेक्शन नहीं कर पाते और अकाउंट से डिविडेंड या राशि निकालने में भी दिक्कत आती है। वहीं, AMC को योजना की जानकारी साझा करने और राशि जमा कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस नए प्रस्ताव का उद्देश्य म्यूचुअल फंड निवेश प्रक्रिया को सुरक्षित, पारदर्शी और सुचारू बनाना है।
म्यूचुअल फंड अकाउंट केवल पूरी KYC के बाद खुलेंगे
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलने और निवेश प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एएमसी केवल सत्यापित केवाईसी दस्तावेज मिलने के बाद ही नया अकाउंट खोल सकेगी। दस्तावेजों को केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRA) को फाइनल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। निवेश केवल तब संभव होगा जब केआरए अकाउंट को केवाईसी अनुपालन वाला चिह्नित करे। निवेशकों को केवाईसी प्रक्रिया के हर चरण में ईमेल और मोबाइल नंबर के जरिए सूचित किया जाएगा। सेबी ने एएमसी और केआरए को अपने सिस्टम और प्रक्रियाओं को नए नियमों के अनुसार ढालने के निर्देश दिए हैं और इस प्रस्ताव पर 14 नवंबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।





