नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। न्यूज ऐजेंसी PTI के हवाले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के दौरान 20 लाख रुपये से कम सालाना कमाने वाले लोगों को टैक्स से राहत मिली है। वहीं जिनकी सालान आय 50 लाख रुपये से अधिक है उनके टैक्स को बढ़ा दिया गया है। यह जानकारी बुधवार को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अधिकारियों ने दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि चोरी और काले धन विरोधी कड़े कानूनों के कारण आयकर रिटर्न दाखिल करनो वालों की संख्या भी बढ़ गई है।
सालाना 7 लाख तक कमाने वालों को नहीं देना पड़ेगा टैक्स
कर बोर्ड के अनुसार, साल 2014 में 2.5 लाख से 7 लाख तक की आय वाले लोगों को 25 हजार रुपये का टैक्स देना होता था मगर साल 2024 से 7 लाख तक कोई कर नहीं देना होता है। इसी तरह 7 लाख से 10 लाख लाख तक सालाना आय वोले लोगों को 43 हजार रुपये का टैक्स देना होता था।
50 लाख से ज्यादा आय वालों को देना पड़ेगा ज्यादा टैक्स
आयकर रिटर्न के आंकड़ो से बताते है कि 2023-24 में 50 लाख से अधिक सालाना कमाने वाले लोगों की संख्या 9.39 लाख हो गई है, जो 2013-14 में सिर्फ 1.85 लाख थी। यानी, पिछले 10 सालों में ऐसे लोग पांच गुना ज्यादा बढ़ गए है। इसके अलावा 2014 में 50 लाख से ज्यादा कमाने वाले लोग 2.52 लाख करोड़ रुपये का टैक्स देते थे जो 3.2 गुना बढ़कर 2024 में 9.62 लाख रुपये हो गई है।
50 लाख से ज्यादा आय वाले लोग ज्यादा टैक्स देते है
सूत्रों के अनुसार, 50 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले लोगो से 76 प्रतिशत टैक्स मिलता है। जिससे मध्यम वर्ग के लोगों पर टैक्स का बोझ कम हुआ है। इसके अलावा मोदी सरकार ने चोरी और काले धन विरोधी कानून लागू किए थे जिससे 50 लाख से ज्यादा सालाना आय वाले ITR दाखिल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 2014 में 2 लाख से ज्यादा कमाने वाले लोगों को टैक्स देना पड़ता था मगर मोदी सरकार ने कई छूट और कटौतियां घोषित की थी जिसके कारण 7 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों को कोई कर नहीं देना पड़ता।
उभरती अर्थव्यवस्था में सबसे कम टैक्स
सुत्रों के अनुसार, 10 लाख रुपये से कम आय वाले लोगों से टैक्स लेने की संख्या कम हो गई है। साल 2014 में 10 लाख रुपये से कम आय वाले लोग कुल टैक्स का 10.17 प्रतिशत हिस्सा देते थे मगर 2024 में यह प्रतिशत घटकर 6.22 प्रतिशत हो जाएगा।
साल 2023-24 में 2.5 लाख से 7 लाख रुपये के सालाना आय के लोगो को 43000 का टैक्स देना पड़ता था। यह टैक्स उनकी आय का 4-5 प्रतिशत है जो उभरती अर्थव्यवस्था में सबसे कम है।
सुत्रो के अनुसार, अधिकारिक गणना से 10 सालों में मंहगाई पर ध्यान रखने के बाद 10-20 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों से टैक्स में 60 प्रतिशत की कमी आई है।
साल 2013-14 में आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले लोगो की संख्या 3.60 करोड़ थी जो 2023-24 में बढ़कर 7.97 करोड़ हो गई है। यानी पिछले दस सालों में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में 121 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।





