नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिवाली का त्योहार आते ही पूरे देश में रौनक छा जाती है। घर-घर दीयों की चमक, मिठाइयों की मिठास और साथ ही कर्मचारियों के चेहरों पर एक अलग ही चमक दिवाली बोनस की वजह से देखनें को मिलती है। लेकिन,क्या कभी आपने सोचा है कि दिवाली पर ही बोनस क्यों दिया जाता है? और ये परंपरा आखिर कब शुरू हुई? अब जानिए इस खबर में बोनस से जुड़ी वो बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे!
दिवाली पर ही बोनस क्यों?
त्योहारों के मौसम में खर्चे अपने आप बढ़ जाते हैं। नए कपड़े, सजावट, मिठाइयां, गिफ्ट और यात्रा। ऐसे में सरकार और संस्थान कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए दिवाली से पहले बोनस का ऐलान करते हैं। यह न सिर्फ एक आर्थिक सहारा होता है, बल्कि उत्सव का हिस्सा भी बन गया है। सरकारी कर्मचारियों को जो बोनस मिलता है, वह अक्सर नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (Ad-hoc Bonus) होता है, जो औसतन 30 दिन की बेसिक सैलरी के बराबर होता है।
कहां से शुरू हुई बोनस की परंपरा?
1940 ब्रिटिश राज में कंपनियों ने जब साल में 52 की बजाय 48 हफ्तों की सैलरी देने का निर्णय लिया, तो कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैल गई। विरोध के चलते ब्रिटिश सरकार को दिवाली पर “बोनस” के रूप में एक अतिरिक्त वेतन देने का फैसला करना पड़ा। यह कदम कर्मचारियों को खुश करने के लिए था, पर समय के साथ यह एक स्थायी परंपरा बन गई।
1965 में मिला कानूनी रूप
वर्ष 1965 में भारत सरकार ने “Payment of Bonus Act” पारित किया, जिसमें कंपनियों को अनिवार्य किया गया कि वे योग्य कर्मचारियों को कम से कम 8.33% बोनस दें। यानी अब यह कोई सौगात नहीं, बल्कि एक कानूनी अधिकार बन गया।
2024-25 में क्या रहा ट्रेंड?
इस साल यानी 2024-25 में करीब 3.8 मिलियन सरकारी कर्मचारियों को दिवाली बोनस मिला है, जो औसतन 7,000 रुपए के आसपास रहा जो पिछले साल के बराबर है। यह ऐलान वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा किया गया।
त्योहारों में घर के खर्च आसान हो जाते हैं
फेस्टिव फाइनेंशियल सपोर्ट: त्योहारों में घर के खर्च आसान हो जाते हैं।
मनोबल में इज़ाफा: कर्मचारियों को काम करने की ऊर्जा मिलती है।
इकोनॉमी को बूस्ट: मार्केट में खरीदारी बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है।
सभी को लाभ: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलता है।
आज दिवाली बोनस सिर्फ पैसे का लेन-देन नहीं, बल्कि त्योहार की खुशी का हिस्सा बन चुका है। यह न केवल जेबें भरता है, बल्कि दिल भी। यही वजह है कि हर साल





