नई दिल्ली,एजेंसी। तीनों सेनाओं और एनडीआरएफ की चिकित्सा शाखाओं को रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु युद्ध की स्थितियों में प्रबंधन के लिए मंगलवार से प्रशिक्षण शुरू किया गया है। मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की ओर से आयोजित कार्यशाला में सेना, नौसेना, वायु सेना और एनडीआरएफ के 60 चिकित्सा और नर्सिंग अधिकारियों को आपात स्थितियों के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु युद्ध के लिए शुरू हुआ प्रशिक्षण
मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के चिकित्सा और नर्सिंग अधिकारियों को रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) की आपात स्थितियों पर प्रशिक्षण देने के लिए आज से आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में एक कार्यशाला शुरू की है। चिकित्सा प्रबंधन पर 10 फरवरी तक चलने वाली इस 11वीं कार्यशाला में भारतीय सेना, भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना और एनडीआरएफ के 60 चिकित्सा और नर्सिंग अधिकारी भाग ले रहे हैं।
60 चिकित्सा और नर्सिंग अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाएगी
कार्यशाला का उद्देश्य युवा सेवा चिकित्सा पेशेवरों को सीबीआरएन पर्यावरण में काम करने और सीबीआरएन एक्सपोजर के प्राथमिक उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित करना है। सशस्त्र सेना मेडिकल कॉलेज, परमाणु चिकित्सा और संबद्ध विज्ञान संस्थान, एनडीआरएफ, भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना इकाइयों के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक अपने व्याख्यानों, प्रदर्शन और सीबीआरएन उपकरणों के उपयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
आर्मी हॉस्पिटल में प्रशिक्षण शुरू किया गया
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल बीआर कृष्णा ने आज कार्यशाला का उद्घाटन किया। आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एके जिंदल, एकीकृत रक्षा स्टाफ (चिकित्सा) के उप प्रमुख एयर मार्शल राजेश वैद्य, तीनों सेवाओं के चिकित्सा निदेशालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसे राष्ट्रीय प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ पेशेवर भी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित थे।




