नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए नया करिकुलम लागू करने का फैसला लिया है। यह बदलाव National Education Policy 2020 (NEP 2020) के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पढ़ाई को ज्यादा प्रैक्टिकल और स्किल-बेस्ड बनाना है। नए नियम 2026-27 से लागू होंगे और छात्रों की पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
CBSE करिकुलम में 6वीं से तीसरी भाषा होगी अनिवार्य
नए करिकुलम के तहत अब कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। इसमें R1, R2 और R3 फॉर्मेट लागू किया जाएगा इसका मतलब है कि छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं सीखनी होंगी, जबकि तीसरी भाषा विदेशी भी हो सकती है। इस बदलाव का मकसद बच्चों में भाषाई समझ और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ाना है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कक्षा 9-10 तक पहुंचते-पहुंचते छात्रों को तीनों भाषाओं में पास होना जरूरी होगा, जिससे भाषा शिक्षा को और गंभीरता से लिया जाएगा।
9वीं-10वीं में वोकेशनल एजुकेशन भी जरूरी
CBSE के नए ढांचे में कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए वोकेशनल (स्किल) शिक्षा को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
इसमें छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ स्किल-बेस्ड विषयों जैसे आईटी, रिटेल, टूरिज्म, एग्रीकल्चर आदि का विकल्प मिलेगा, जिससे वे भविष्य के करियर के लिए तैयार हो सकें। नई शिक्षा प्रणाली में पढ़ाई को सिर्फ थ्योरी तक सीमित न रखकर प्रैक्टिकल और रियल-लाइफ एप्लिकेशन पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
क्या बदलेगा छात्रों के लिए?
- रटने की बजाय समझ और स्किल पर फोकस
- भाषा और संस्कृति की बेहतर समझ
- शुरुआती स्तर से करियर ओरिएंटेड शिक्षा
- पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल अनुभव
कुल मिलाकर CBSE का यह नया करिकुलम छात्रों को “बुकिश नॉलेज” से बाहर निकालकर “रियल वर्ल्ड स्किल्स” की ओर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।




