नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का अत्यंत विशेष महत्व होता है। हर माह की पूर्णिमा किसी न किसी धार्मिक पर्व या उपासना से जुड़ी होती है, लेकिन कार्तिक मास की पूर्णिमा को सबसे पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का पर्व मनाया जाता है, जिसे देवताओं की दिवाली कहा जाता है। इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण, शिवजी, और गंगा माता की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। चलिए जानते हैं इस साल कार्तिक पूर्णिमा किस दिन मनायी जायेगी।
कार्तिक पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का पर्व इस वर्ष 5 नवंबर 2025, मंगलवार को मनाया जाएगा। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी-देवता पृथ्वीलोक पर आते हैं और गंगा स्नान व दीपदान का विशेष पुण्य मिलता है। इसी कारण इसे देव दीपावली के रूप में मनाया जाता है। वहीं, सिख धर्म के अनुयायी इस दिन को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के रूप में बड़ी श्रद्धा से मनाते हैं। ऐसे में यह दिन हिंदू और सिख दोनों समुदायों के लिए अत्यंत पावन और विशेष महत्व रखता है।
जानिए स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 4 नवंबर 2025 को रात 10:36 बजे होगी और यह समाप्त होगी 5 नवंबर 2025 को शाम 6:48 बजे।
गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से 05:44 बजे तक रहेगा।
पूजा का शुभ समय: सुबह 07:58 बजे से 09:20 बजे तक निर्धारित है।
प्रदोषकाल में देव दीपावली मुहूर्त: शाम 05:15 बजे से रात 07:05 बजे तक रहेगा।
चंद्रोदय: शाम 05:11 बजे होगा।
इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और लक्ष्मी-नारायण सहित भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस तिथि पर श्रद्धापूर्वक किया गया दान-पुण्य अक्षय फल देता है।
ऐसे करें व्रत और पूजन, जानिए सही विधि
कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले गंगा स्नान करें। यदि संभव न हो तो घर पर स्नान के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद फलाहार व्रत का संकल्प लें। ध्यान रखें कि इस व्रत में अनाज, मसाले, तंबाकू, चाय-कॉफी और तामसिक भोजन वर्जित होता है। व्रत का संकल्प लेने के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती की षोडशोपचार विधि से पूजा-अर्चना करें। इसके साथ ही भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को पुष्प, दीप, फल, मिष्ठान्न आदि अर्पित करें।
इस दिन सत्यनारायण कथा का पाठ अवश्य करें। ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र, तिल, घी, चावल आदि का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। तालाब या नदी में दीपदान करना भी विशेष पुण्यदायी होता है। पूजन और दान के बाद नियमपूर्वक व्रत का पारण करें।
(अस्वीकरण: यहां प्रस्तुत जानकारी केवल सामान्य धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि या प्रमाणिकता की जिम्मेदारी नहीं लेते हैं।)




