नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उड़ीसा के पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा जो आनेवाले 27 जून से शुरू हो रही है, जो 5 जुलाई को समाप्त होगी। इसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने वाले है। क्योंकि मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा रथ खींचने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते है तो जाने रथ खींचने से जुड़े नियम के बारे में।
बता दे, जगन्नाथ मंदिर की यह रथयात्रा गुंडीचा मंदिर तक जाती है, जिसमें हर व्यक्ति भाग लेता है जिसके लिए उसे कुछ कदमों तक ही रथ खींचने की अनुमति होती है। ऐसे में अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं, तो आपको रथ खींचने से जुड़े नियम जानना जरूरी है।
भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने का क्या है नियम –
भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए हर जाति, पंत, प्रांत या देश के लोग खींच सकते हैं, यानी इस रथ को खींचने को लेकर कोई अलग से नियम नहीं है, प्रभु की नजरों में सभी भक्त एक समान है। हा इस यात्रा में तीनों रथों को क्रम से भक्त रस्सी से खींचते हैं, क्योंकि माना जाता है कि रथ खींचने वाला व्यक्ति जीवन मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
कैसा होता है रथ –
बता दें कि, इस यात्रा में तीन रथ शामिल होते है, जिसमें भगवान जगन्नाथ के रथ को को ‘नंदीघोष’, बलराम जी के रथ को ‘तालध्वज’ और बहल सुभद्रा के रथ को को ‘दर्पदलन पद्म’ रथ कहा जाता है। जिसमें भगवान जगन्नाथ का रथ 45 फीट ऊंचा और 16 पहिए होते हैं, बलराम जी का रथ 43 फीट ऊंचा 14 पहिए वाला होता है.जबकि, देवी सुभद्रा का रथ 42 फीट ऊंचा होता है और इसमें 12 पहिए होते हैं।
यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है,
यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है. इस यात्रा में हर व्यक्ति को रथ खींचने का अवसर मिलता है, लेकिन कुछ कदमों तक ही रथ खींचने की अनुमति होती है। किसी भी धर्म, जाति, प्रांत या देश का व्यक्ति रख खींच सकता है। ऐसा इसलिए होता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रथ खींचने का मौका मिल सके। यदि आप रख को नहीं खींच पाते हैं, तो भी कोई समस्या नहीं है। इस रथ यात्रा में पूरे भक्तिभाव से शामिल होने पर ही हजारों यज्ञों के बराबर आपको पुण्य मिल जाता है।





