नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को हिन्दू धर्म में विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन इसलिए विशेष है क्योंकि इसी तिथि को भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। वर्ष 2025 में यह पर्व 24 नवंबर की रात 09:22 बजे से 25 नवंबर की रात 10:56 बजे तक रहेगा। इसलिए इस वर्ष विवाह पंचमी का मुख्य उत्सव 25 नवंबर को मनाया जाएगा।
शादी क्यों नहीं होती इस दिन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह पंचमी को मानव विवाह के लिए शुभ नहीं माना जाता। इसका कारण राम-सीता के जीवन से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, विवाह के तुरंत बाद भगवान राम को 14 वर्षों का वनवास सहना पड़ा। माता सीता को अपहरण, वनवास और अग्निपरीक्षा जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं के आधार पर यह मान्यता बनी कि इस दिन मानव विवाह करने से नवविवाहित जोड़े को जीवन में बाधाएं और कष्ट झेलने पड़ सकते हैं।
राम-सीता के जीवन की चुनौतियां
रामायण के अनुसार, विवाह के बाद राम को राजसिंहासन छोड़कर वनवास जाना पड़ा, जबकि सीता को अपहरण, अलगाव और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा। यही कारण है कि कई पीढ़ियों ने इस दिन को शोक स्मरण और पूजा-अर्चना का दिन माना, न कि नए बंधन बनाने का।
ज्योतिष शास्त्र में पंचमी तिथि को भगवान राम से जोड़ा गया है। पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन के ग्रह-योग विवाह मुहूर्त के लिए अनुकूल नहीं होते। विवाह के लिए गौरी-मंगल जैसे शुभ योगों की आवश्यकता होती है, जो इस तिथि में नहीं मिलते।
अयोध्या और जनकपुर में उत्सव
अयोध्या और नेपाल के जनकपुर में विवाह पंचमी का पर्व बड़े उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यहाँ राम-सीता के विवाह की झांकियां सजाई जाती हैं, भजन-कीर्तन होते हैं और हजारों श्रद्धालु इस अवसर पर पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं।अविवाहित कन्याएं माता सीता की पूजा कर मनचाहा वर पाने की कामना करती हैं।विवाहित महिलाएं विशेष पूजा कर अपने दांपत्य जीवन में प्रेम और सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं।
पंडितों की सलाह
श्री राम जन्मभूमि मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित विजय शर्मा कहते हैं, विवाह पंचमी दिव्य विवाह का स्मरण है। इसे नई मानव शादी के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और पूजा-अर्चना के लिए उपयोग करना चाहिए। इस दिन के ग्रह-योग विवाह के लिए अनुकूल नहीं हैं। विवाह पंचमी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मानव विवाह नहीं किया जाता, बल्कि इसे राम-सीता के दिव्य विवाह का स्मरण और पूजा-अर्चना का दिन माना जाता है। जोड़े जो विवाह की योजना बना रहे हैं, उन्हें शुभ मुहूर्त का चयन कर इस दिन पूजा-अर्चना में समय व्यतीत करना चाहिए।




