नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि खास महत्व माना जाता है, 12 महीने पड़नेवाली पूर्णिमा इस बार होगी काफी खास क्योंकि इस बार की ज्येष्ठ अमावस्या के दिन आने वाली पूर्णिमा को वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा, जो आनेवाले 10 जून 2025 को होगा। ये व्रत महाराष्ट्र, गुजरात आदि में विशेषतौर पर रखा जाता है। आइए जानते है इस व्रत की संपूर्ण जानकारी के बारे में ।
आपको बता दें, उत्तर भारत में जहां ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है तो वहीं महाराष्ट्र, गुजरात आदि में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है। जो इस बार वट पूर्णिमा का व्रत 10 जून को रखा जाएगा। साल में वट सावित्री का व्रत दो बार रखा जाता है।ऐसे में आइए जानते हैं इसके महत्व के बारे में।
व्रट सावित्री पूर्णिमा की पूजा कैसे करें
इस बार वट पूर्णिमा व्रत रखने के लिए रोजाना की तरह स्नानकर्म से निवृत होकर साफ कपड़े पहने।
इस दिन महिलाओं को वैसे लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए जिसमें सोलह श्रंगार भी करना चाहिए।
फिर हाथ में काले तिल व सिक्के को लेकर व्रत का संकल्प ले।
इसके बाद बरगद यानी वट वृक्ष के पास जाकर पहले उसकी सफाई करें फिर इस संकल्प के सिक्के तिल को वहां छोड़ दे।
इसके बाद विधि विधान से वट वृक्ष के चारों ओर 7 बार मौली का धागा हाथ में किश्मिश या चावल का दाना लेकर लपेटती जाऐं।
हर एक परिक्रमा पर अपने पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना करें।
फिर वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुने।
और लास्ट में भोग प्रसाद लगाकर बारती करे।
व्रत पारण में सादा भोजन करे।
वट सावित्री पूर्णिमा व्रत
वट सावित्री पूर्णिमा पौराणिक ग्रंथों अनुसार, इसका खास महत्व है जिसे हर सुहागिन स्त्री अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए मनाती है जिसे हर साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत में, महिलाएंबरगद यानी वट वृक्ष की पूजा करती हैं । फिर विधि विधान से पूजा कर अपने व्रत को खोलती है1
कब है वट सावित्री पूर्णिमा व्रत
हिंदू पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर पड़नेवाली वट सावित्री पूर्णिमा व्रत बहुत खास मानी जाती है जो 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर शुरु होगी। जिसका समापन अगले दिन यानी 11 जून को दोपहर 1 बजकर 13 मिनट पर होगा।





