नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में कुंभ और माघ मेले का विशेष महत्व है। माना जाता है कि संगम में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साल 2026 की शुरुआत इसी पवित्र अवसर के साथ गई है। क्योंकि प्रयागराज में माघ कुंभ मेला आज 3 जनवरी से आरंभ हो रहा है। गंगा स्नान के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है।
प्रयागराज, जिसे संगम नगरी भी कहा जाता है
प्रयागराज, जिसे संगम नगरी भी कहा जाता है, वहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से गिरी एक बूंद यहीं गिरी थी, इसी वजह से यह भूमि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसी आस्था के चलते हर साल माघ मेले का आयोजन किया जाता है, जबकि हर 12 वर्ष में महाकुंभ लगता है। वर्ष 2025 में महाकुंभ के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई थी और अब 2026 में माघ कुंभ की भव्य तैयारी पूरी कर ली गई है।
माघ कुंभ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा,
माघ कुंभ मेला आज 3 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा, जिसमें कुल छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे। 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ मेले की शुरुआत होगी। इसके बाद 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा और अंत में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन अंतिम स्नान पर्व के साथ कुंभ का समापन होगा। इन सभी तिथियों पर संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
प्राइवेट टैक्सी को मेला क्षेत्र के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होती।
अगर आप कुंभ मेले में जाने की योजना बना रहे हैं तो प्रयागराज पहुंचने के कई आसान विकल्प मौजूद हैं। सड़क मार्ग से आप कार या बस के जरिए प्रयागराज पहुंच सकते हैं। कानपुर, लखनऊ, झांसी, हरदोई और आसपास के शहरों से नियमित और विशेष बस सेवाएं चलाई जाती हैं। ट्रेन यात्रा सबसे सुविधाजनक मानी जाती है, क्योंकि कुंभ के दौरान रेलवे द्वारा कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं। प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज छिवकी और रामबाग स्टेशन प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। शहर पहुंचने के बाद लोकल साधनों जैसे ई-रिक्शा और शटल बसों का उपयोग करना बेहतर रहेगा, क्योंकि कई बार प्राइवेट टैक्सी को मेला क्षेत्र के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं होती।
संगम स्नान के लिए हल्का सामान ही साथ रखें।
तैयारी की बात करें, तो संगम स्नान के लिए हल्का सामान ही साथ रखें। सर्दी के मौसम को देखते हुए ऊनी कपड़े जरूर पहनें और एक अतिरिक्त जोड़ी कपड़े अपने पास रखें। खाने-पीने का थोड़ा सामान, जरूरी दवाइयां और अपने पहचान पत्रों की फोटोकॉपी साथ रखना समझदारी होगी। कीमती सामान और ज्यादा नकदी रखने से बचें।
कुंभ मेले के दौरान अपने सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें
संगम स्नान के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। सुबह जल्दी पहुंचने पर भीड़ कम रहती है और स्नान शांतिपूर्वक हो पाता है। सुबह 10 बजे के बाद भीड़ तेजी से बढ़ती है, जो शाम तक बनी रहती है। ठहरने के लिए संगम क्षेत्र में टेंट सिटी और आश्रय निवास बनाए जाते हैं, जहां श्रद्धालु रुक सकते हैं।
कुंभ मेले के दौरान अपने सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें। किसी की आस्था या भावना को ठेस न पहुंचे, इसका खास ख्याल रखें। बेहतर होगा कि आप 1 से 2 दिन की यात्रा की योजना बनाएं और संगम स्नान के साथ आध्यात्मिक वातावरण का पूरा आनंद लें।






