नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भगवान विष्णु के अवतार मानेजानेवाले, भगवान जगन्नाथ जिनकी पूजा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ की जाती है। देशभर में उनके कई मंदिर मंदिर है लेकिन इन सबमें पुरी (ओडिशा) का जगन्नाथ मंदिर सबसे खास और प्रमुख माना जाता है, जिसमें मंदिर चार धामों में से एक माना जाता है,जहां हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। मान्यता है कि इस उत्सव में भाग लेने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है लेकिन इनमें सबसे खास है इस मंदिर की पवित्र तीसरी सीढ़ी जिसके बारे में हर कोई नही जानता इसका खास रहस्य। जानें वो खास रहस्य के बारे में।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी
बता दे, भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, जिनकी पूजा उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ की जाती है। देशभर में उनके कई मंदिर हैं, लेकिन पुरी (ओडिशा) का जगन्नाथ मंदिर सबसे प्रमुख और पवित्र माना जाता है। यह मंदिर चार धामों में से एक है, पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी को अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिस पर पैर रखने की मनाही होती है क्योंकि, भगवान विष्णु के चरण पड़े थे, इसलिए इसे स्पर्श करना भी अनुचित माना जाता है। जहां हर वर्ष आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करते है।
सीधा संबंध यमराज से
धार्मिक मान्यता अनुसार, पुरी का जगन्नाथ मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके साथ जुड़े अनेक रहस्य आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करते हैं।बता दे, इस मंदिर की संरचना विशेष नियम जैसे तीसरी सीढ़ी पर पैर न रखने की परंपरा इसे और भी रहस्यमयी बनाते हैं। श्रद्धालुओं में हमेशा से इन रहस्यों को जानने की उत्सुकता हमेशा बनी रहती है, जिससे यह मंदिर आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा का भी केंद्र बना हुआ है। जिसका सीधा संबंध यमराज से माना जाता है। आइए जानते हैं विस्तार से।
जगन्नाथ पुरी आध्यात्मिक महत्व
पुरी जगन्नाथ आध्यात्मिक दृष्टि से पृथ्वी का वैकुंठ कहा जाता है। यहां भगवान श्रीहरि का वास है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से ही व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मुक्ति मिलती है। इसलिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल यहां दर्शन के लिए आते हैं। आषाढ़ महीने में निकलने वाली रथ यात्रा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें श्रद्धालु न केवल भगवान की भव्य झांकी देखते हैं इस मंदिर के अंदर से होकर गुजरने से और भगवान के सामने आने से जीवन के सारे दुख और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
तीसरी सीढ़ी का रहस्य
जगन्नाथ मंदिर की कुल 22 सीढ़ियां है जिनमें तीसरी सीढ़ी का खास महत्व है, इसे यम शिला भी कहा जाता है, पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार यमराज भगवान जगन्नाथ से मिलने आए। यमराज ने बताया कि इस मंदिर में दर्शन करने वाले को यमलोक नहीं जाना पड़ता। तब भगवान जगन्नाथ ने यमराज के लिए तीसरी सीढ़ी को उनका विशेष स्थान देते हुए इसे यम शिला घोषित किया।
तीसरी सीढ़ी पर पैर न रखने का नियम
मान्यता अनुसार, भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद इस तीसरी सीढ़ी पर पैर रखता है उसके सारे पाप जरूर धुल जाते हैं, लेकिन उसे यमलोक अर्थात मृत्यु लोक जाना पड़ता है। इसलिए मंदिर में यह नियम बना कि किसी भी श्रद्धालु या पुजारी को तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखना चाहिए। यह नियम भक्तों की रक्षा और उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए बनाया गया है। तीसरी सीढ़ी को यमराज से जोड़ने की यह कथा मंदिर की पवित्रता और रहस्यमयता को बढ़ाती है। इससे मंदिर में श्रद्धालुओं का विश्वास और आस्थाको बढ़ाता है। हर भक्त इसे सम्मान के साथ मानता है और मंदिर के नियमों का पालन करता है।





