नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । 11 जुलाई से सावन 2025 का पवित्र महीना शुरू हो गया है। शिव भक्त पूरे साल इस महीने का इंतजार करते है। इस महीने शिव भक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। शिव की भक्ति और साधना के लिए श्रावण मास को खास माना जाता है। इस महीने भक्त मीलों पैदल चलकर पवित्र कावंड़ लाते हैं और भगवान शिव को अर्पित करते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने जब हलाहल विष पीया तो उनका शरीर जल रहा था। इस जलन को शांत करने के लिए ही सावन के माह में भगवान शिव पर जल अर्पित किया जाता है। लेकिन इसके कुछ नियम और कायदे हैं।
जल चढ़ाते समय ना करें ये गलती
सनातन में सावन के महीने को पवित्र माना जाता है। हिंदू धर्म में शिव की भक्ति की महिमा सभी ग्रंथों और पुराणों में मिलती है। इस माह में सभी शिव का जलाभिषेक करते हैं लेकिन अधिकतर लोग आजकल एक गलती करते हैं। इस गलती की वजह से उनकी पूजा का फल या लाभ नहीं मिल पाता है। वो गलती ये है कि लोग अपने घर से जल लेकर नहीं जाते अपितु मंदिर में रखे हुए जल से ही जलाभिषेक करते हैं। इस सावन में आप यह गलती ना करें।
जल में सब कुछ आत्मसात करने का होता है गुण
मान्यता के अनुसार, अगर आप अपने घर से जल लेकर जाते हैं तो अगर आपके घर में नकारात्मकता है तो शिव पर वह जल चढ़ाने से आपके घर की नेगेटिविटी दूर होती है। अगर ऐसा नहीं भी है तो भी जब आप अपने घर का जल शिव पर चढ़ाएंगे तो उसकी ऊर्जाएं आपके घर को शुभता और सौभाग्य प्रदान करेंगी।
घर के जल से ही शिव का जलाभिषेक करें
पौराणिकता के अनुसार, बीते कुछ समय की बात करें तो उस दौरान पवित्र नदियों का जल या जलाशयों के पवित्र जल से शिव का जलाभिषेक किया जाता था। धीरे-धीरे यह परंपरा विलुप्त हो गई या फिर शहरी परिवेश में ऐसा संभव न हो पाया। लेकिन फिर भी हमें अपने घर से जल ले जाकर ही शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। इससे हमारे जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति आती है।
वहीं, शिव को जल चढ़ाते समय एक और गलती है जो हम करते हैं। कभी भी शिव की जलधारा टूटने नहीं देनी चाहिए। जब हम शिव पर जल चढ़ाते हैं तो उसे एक धार बनाकर चढ़ाया जाता है। और शिव की जलधारी को कभी भी लांघना नहीं चाहिए। इसके अलावा, शिव पर जल चढ़ाते समय हमेशा याद रखें कि आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। रफ्तार डॉट इन इसकी पुष्टि नहीं करता है।





