नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी वर्ष पर आयोजित ‘संदेश यात्रा’ के उद्घाटन समारोह में अवैध धर्मांतरण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों को लालच और भय दिखाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो संविधान और सामाजिक समरसता के खिलाफ है।
‘औरंगजेब के दौर जैसा कालखंड, लेकिन गुरु तेग बहादुर ने दी चुनौती’
कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने इतिहास की ओर इशारा करते हुए कहा,”वह कैसा कालखंड रहा होगा जब औरंगजेब जैसा क्रूर और बर्बर शासक था। उस दौर में हर ओर अत्याचार था, लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने बलिदान दिया। सीएम योगी ने खुलासा किया कि बलरामपुर में की गई हालिया कार्रवाई में धर्मांतरण के लिए विदेशों से पैसे आने का मामला सामने आया है। अब तक 40 खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन पकड़ा गया है। धर्म बदलवाने के लिए रेट तय थे, यह देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए खतरा है।
साजिश रच रहीं कुछ ताकतें – CM योगी
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश को तोड़ने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश कर रही हैं। यह सिर्फ धर्मांतरण नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर हमला है। प्रदेश सरकार सख्त कदम उठाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम योगी ने गुरु तेग बहादुर संदेश यात्रा का फूल बरसाकर स्वागत किया और इसे लखनऊ से दिल्ली के शीशगंज गुरुद्वारा तक भेजा। यह यात्रा कानपुर, इटावा और आगरा होते हुए चांदनी चौक पहुंचेगी। इस यात्रा से 350 साल पुरानी बलिदान गाथा को जीवंत रूप मिलेगा। आने वाली पीढ़ियों को धर्म और संस्कृति के लिए दी गई कुर्बानियों का बोध होगा।
हिंदू-सिख एकता पर भी बोले योगी
सीएम योगी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान हिंदू और सिख एकता का प्रतीक है। हिंदू-सिख समाज के बीच फूट डालने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन हमें सतर्क रहकर इन साजिशों को नाकाम करना है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय मान्यता देने के फैसले का स्वागत किया। हमें सिख गुरुओं के बलिदान को सिर्फ इतिहास न बनाकर, उसे आज की रणनीति में ढालने की ज़रूरत है, ताकि कोई भी व्यक्ति जबरन अपनी आस्था न बदले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान न सिर्फ अवैध धर्मांतरण के खिलाफ सरकार की कड़ी नीति को दर्शाता है, बल्कि समाज में एकता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार इस दिशा में और क्या ठोस कदम उठाती है।





