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Thursday, March 12, 2026
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Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी किस तारीख को है, जानें ये दोनों एक ही दिन है क्या?

शारदीय नवरात्रि में अष्टमी 30 सितंबर और नवमी 1 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ये दोनों तिथियां माता की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। ऐसे में पूजा का मुहूर्त और इस दिन क्या करें जान लें।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । इस वर्ष शारदीय नवरात्रि आज 22 सितंबर, सोमवार से आरंभ हो रही है। परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम दो दिन- महाष्टमी और महानवमी पर विशेष रूप से देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इन तिथियों पर श्रद्धालुओं की भारी आस्था देखने को मिलती है।

शारदीय नवरात्रि 2025 में अष्टमी तिथि 30 सितंबर को पड़ेगी, जबकि महानवमी की पूजा 1 अक्टूबर को होगी। इन दोनों दिनों को माता की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। श्रद्धालु इसी अवधि में कन्या पूजन और हवन जैसे विशेष अनुष्ठान करते हैं। अब जानते हैं अष्टमी-नवमी पूजा के शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तिथि।

देवी पुराण के मुताबिक, जब नवरात्रि सोमवार से आरंभ होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं। हाथी को उनका शुभ और समृद्धि देने वाला वाहन माना गया है। इसलिए इस साल की शारदीय नवरात्रि नौ दिनों तक सुख-समृद्धि और मंगलकारी फल प्रदान करने वाली मानी जा रही है।

2025 में शारदीय नवरात्रि की अष्टमी

अश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू – 29 सितंबर 2025, शाम 4.31

अश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त – 30 सितंबर 2025 को शाम 6.06

मां महागौरी पूजा मुहूर्त – सुबह 9.12 – दोपहर 1.40 (कन्या पूजन भी इस दौरान करें)

2025 में शारदीय नवरात्रि की नवमी

अश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुरू – 30 सितंबर 2025 को शाम 6.06

अश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समाप्त – 1 अक्टूबर 2025, रात 7.01

मां सिद्धिदात्री पूजा – सुबह 10.41 – दोपहर 12.10

आयुध पूजा विजय मुहूर्त – दोपहर 02:09 – दोपहर 02:57

नवरात्रि प्रातः हवन मुहूर्त – सुबह 06:14 – शाम 06:07

दुर्गा विसर्जन 2025 (Durga Visarjan 2025)

दुर्गा विसर्जन तारीख – 2 अक्टूबर 2025

दुर्गा विसर्जन मुहूर्त – 06:15 ए एम से 08:37 ए एम

अष्टमी-नवमी पर व्रत नहीं कर पाएं तो करें ये उपाय

जो लोग अष्टमी या नवमी पर देवी पूजा नहीं कर पाते है, वे दान के माध्यम से पुण्य अर्जित कर सकते हैं। मान्यता है कि जरूरतमंद कन्याओं को पढ़ाई का सामान, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, अनाज या धन देने से भी नवरात्रि की नौ दिनों की पूजा के बराबर फल प्राप्त होता है।

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