नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अक्टूबर 2025 में बिहार में त्योहारों की श्रृंखला शुरू होने जा रही है। इसकी शुरुआत आज 2 अक्टूबर को दशहरा से होगी, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसके बाद शरद पूर्णिमा, करवा चौथ, धनतेरस, दिवाली, छठ पूजा समेत कई प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे, जो सांस्कृतिक उत्साह और भव्यता से भरपूर होंगे।
धार्मिक दृष्टि से अक्टूबर 2025 का महीना बेहद खास माना जा रहा है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। जानिए, अक्टूबर में किस दिन कौनसा व्रत या त्योहार मनाया जाएगा और इसकी धार्मिक महत्ता क्या है।
अक्टूबर 2025 व्रत त्योहार
2 अक्टूबर 2025 – दशहरा, विजयादशमी
3 अक्टूबर 2025 – पापांकुशा एकादशी
4 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत
6 अक्टूबर 2025 – कोजागर पूजा, शरद पूर्णिमा
7 अक्टूबर 2025 – वाल्मीकि जयंती, मीराबाई जयंती
8 अक्टूबर 2025 – कार्तिक माह शुरू
10 अक्टूबर 2025 – करवा चौथ, संकष्टी चतुर्थी
13 अक्टूबर 2025 – अहोई अष्टमी
17 अक्टूबर 2025 – रमा एकादशी, तुला संक्रांति
18 अक्टूबर 2025 – शनि प्रदोष व्रत, धनतेरस, यम दीपम
20 अक्टूबर 2025 – नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, दिवाली
21 अक्टूबर 2025 – कार्तिक अमावस्या
22 अक्टूबर 2025 – गोवर्धन पूजा
23 अक्टूबर 2025 – भाई दूज
25 अक्टूबर 2025 – विनायक चतुर्थी
27 अक्टूबर 2025 – छठ पूजा
31 अक्टूबर 2025 – अक्षय नवमी
दशहरा (Dussehra 2025)
दशहरा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है, इसलिए इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। यह दिन श्रीराम द्वारा रावण के वध और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय के अवसर के रूप में मनाया जाता है। इस साल 2 अक्टूबर को दशहरा पर रावण दहन किया जाएगा।
पापांकुशा-रमा एकादशी महत्व
अक्टूबर में आने वाली दोनों एकादशी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अश्विन माह की पापांकुशा एकादशी व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत है, जबकि कार्तिक माह की रमा एकादशी, जो दिवाली से पहले पड़ती है, धन लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए रखी जाती है। रमा मां लक्ष्मी का ही एक नाम है, इसी कारण ये दोनों एकादशी विशेष महत्व रखती हैं।
शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima)
सालभर में यह एकादशी विशेष इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। जो व्यक्ति रात्रि में जागकर उनकी पूजा करता है, उसके धन और अन्न का भंडार हमेशा भरा रहता है। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है। इस अवसर पर खुले आसमान के नीचे दूध-चावल से बनी खीर रखी जाती है, जिसमें चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकने और खीर को अमृत तुल्य होने की मान्यता है।
दिवाली (Diwali 2025)
इस साल दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए रात 7:08 बजे से 8:18 बजे तक शुभ मुहूर्त है। लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करना उत्तम माना जाता है। वहीं, निशिता काल में पूजा का मुहूर्त रात 11:41 बजे से 12:31 बजे तक है।
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