नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । करवा चौथ हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना जाता है। इस दिन वे अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चंद्रमा की पूजा करके ही अपना व्रत खोलती हैं, जो पर्व की खास परंपरा है।
करवा चौथ को कठोर व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 12 घंटे तक निर्जला व्रत रखा जाता है, जिसमें न भोजन और न पानी लिया जाता है। यह पर्व वैवाहिक प्रेम और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं कि इस साल करवा चौथ का व्रत किस दिन मनाया जाएगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह-सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं, दिनभर पूजा की तैयारी और कथा सुनने में व्यस्त रहती हैं, और शाम को चंद्रमा के दर्शन कर उसे अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करती हैं। यह पर्व सच्चे वैवाहिक प्रेम और निष्ठा का रंगीन उत्सव है।
व्रत खोलते समय महिलाएं अपने पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत समाप्त करती हैं। इस साल करवा चौथ किस दिन को मनाया जाएगा। जानें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और धार्मिक महत्व।
कब है करवा चौथ 2025?
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ: 09 अक्टूबर, रात 10:54 बजे
तिथि का समापन: 10 अक्टूबर, शाम 7:38 बजे
पूजन का शुभ मुहूर्त: 05:16 बजे से 06:29 बजे तक
महिलाएं इस दिन सर्गी लेकर उपवास रखेंगी और शाम को पूजा कर व्रत कथा सुनेंगी। व्रत खोलते समय वे अपने पति के हाथ से जल ग्रहण करेंगी।
करवा चौथ 2025 चंद्रोदय का समय
करवा चौथ 2025 में चंद्रोदय का समय 10 अक्टूबर को शाम 7:42 बजे रहेगा। ध्यान रहे, यह समय शहर के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर रख सकता है।
करवा चौथ 2025 शुभ योग
करवा चौथ 2025 पर विशेष शुभ योग बन रहे हैं। इस साल यह पर्व रोहिणी नक्षत्र के साथ अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग में पड़ रहा है। इसके साथ ही, इस दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जा रहा है, जो और भी अधिक धार्मिक महत्व देता है।
करवा चौथ 2025 धार्मिक महत्व
करवाचौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्ध जीवन और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, माता पार्वती ने यह व्रत भगवान शिव को पाने के लिए रखा था। कई क्षेत्रों में सरगी देने की परंपरा भी है, जिसमें सास अपनी बहू को मेवे, फल, मिठाइयां और श्रृंगार का सामान देती है।
करवाचौथ पर दी जाने वाली सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण की जाती है और यह पूरे दिन व्रत रखने की शक्ति प्रदान करती है। इस दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने और करवा माता की पूजा करने से मनोकामनाएँ पूरी होती हैं, वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और विश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का संचार होता है।





