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Friday, March 13, 2026
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Janmashtami 2025 : जानिए व्रत के नियम, क्या करें और क्या न करें, ताकि मिले भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद

भक्ति और उल्लास से मनाएं भगवान की लीला का पर्व, भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन जानिए व्रत रखने और पूजा करने के नियम। कैसे करें जन्माष्टमी की भक्ति, जिससे मिले पूजा का पूर्ण फल।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पावन पर्व हर वर्ष देशभर में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता और नियमों का भी खास अवसर होता है। जन्माष्टमी 2025 पर व्रत रखने वाले भक्तों के लिए हम लेकर आए हैं विशेष आर्टिकल जिसमें बताएंगे कि, इस दिन कौन-कौन से नियमों का पालन करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए, ताकि व्रत पूर्ण फलदायी हो।

जन्माष्टमी का व्रत: क्यों और कैसे?

जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक शुद्धि और मन की एकाग्रता का प्रतीक है। व्रत रखने से मानसिक शांति मिलती है और भगवान की कृपा बनी रहती है। लेकिन व्रत सही ढंग से रखना बेहद जरूरी है।

सूर्योदय से पहले उठें और शुद्ध स्नान करें

जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठना शुभ माना गया है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। यह रंग भगवान कृष्ण का प्रिय रंग है। स्नान के बाद पूजा स्थल को साफ-सुथरा करें और गंगाजल से शुद्ध करें।

व्रत का संकल्प: मन और वचन में शक्ति

पूजा आरंभ करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। हाथ में जल, फूल, और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें और भगवान से आशीर्वाद मांगें। यह संकल्प आपकी भक्ति को और मजबूत करेगा।

पूजा में शामिल करें ये खास चीजें

पंचामृत स्नान: दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भगवान की मूर्ति को स्नान कराएं।

पवित्र सामग्री: चंदन, कुमकुम, तुलसी के पत्ते और अक्षत जरूर चढ़ाएं।

प्रिय भोग: मोरपंख, बांसुरी, माखन-मिश्री भगवान को अर्पित करें।

फूलों का महत्व: खासकर कमल और तुलसी के फूलों से पूजा स्थल सजाएं।

दिनभर करें भजन-कीर्तन और कथा पाठ

जन्माष्टमी के दिन ‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे’ का जाप करें। भगवान के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा करें। साथ ही भजन-कीर्तन और जन्माष्टमी की कथा सुनना या पढ़ना भी अत्यंत शुभ होता है।

मध्यरात्रि का महत्व: जन्मोत्सव की धूम

रात 12 बजे, जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था, शंख-घंटियां बजाकर उनका स्वागत करें। इस समय भगवान को झूला झुलाएं, पालने में बिठाएं और आरती करें। व्रत का पारण इसी समय के बाद करें। ध्यान रखें, बाल गोपाल को अकेला न छोड़ें।

व्रत के दिन ये बातें न करें

तामसिक भोजन से बचें: लहसुन, प्याज, मांसाहार, शराब और धूम्रपान से दूर रहें।

अनाज न लें: चावल, गेहूं और दाल का सेवन व्रत में वर्जित है।

तुलसी के पत्ते न तोड़ें: जरूरत हो तो एक दिन पहले ही तोड़ लें।

शांत और सद्भावना बनाए रखें: क्रोध, झगड़े और अपमान से बचें।

जन्माष्टमी व्रत का सही पालन ही सफलता की पूंजी

व्रत के दिन सही नियमों का पालन करने से ही भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और व्रत पूर्ण फलदायी होता है। इसलिए इस जन्माष्टमी पर न केवल भक्ति भाव से, बल्कि नियमबद्ध तरीके से व्रत और पूजा करें।

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