नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत अत्यंत पवित्र माना जाता है,योगिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है ये सभी पापों का नाश करने के साथ काफी कठिन माना जाता है, इसके नियम बहुत सख्त होते हैं। व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है, ताकि व्रत रखने वाले को उसका फल मिल सके। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, समस्त पापों का नाश होता है। लेकिन इन सब के बीच इसके नियमों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते है क्या है वो नियम
बता दे कि, हर महीने आनेवाली एकादशी में बेहद महत्वपूर्ण योगिनी एकादशी जो इस बार जून के 21 तारीख को रखी जाएगी। ये एकादशी सभी पापों का नाश करनेवाली मानी जाती है इसलिए इसके नियम भी काफी सख्त होते है जिसका हम सबको ख्याल रखना चाहिए। आइए जानते है वो जरुरी नियम के बारे में जिसका व्रती को रखना चाहिए ध्यान।
क्या खाएं
समस्त पापों का नाश करनेवाली योगिनी एकादशी के दिन सभी प्रकार के फल खाए जा सकते हैं, जैसे सेब, केला, संतरा, अंगूर, पपीता वही आलू, अरबी आदि. दूध, दही, छाछ, पनीर, मावा आदि का सेवन किया जा सकता है. हां इसमें आप सिंघाड़े का आटा, साबूदाना से बनी पूरी, पराठा, खिचड़ी आदि खाई जा सकती हैं। बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, पिस्ता, मखाना आदि का सेवन कर सकते हैं।
क्या न खाएं
योगिनी एकादशी के व्रत में कुछ चीजों का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है, फिर आप व्रत कर रहे या नही लेकिन इन चीजों से आपको परहेज करना चाहिए, एकादशी के दिन चावल का सेवन करना पूर्णतः वर्जित है। एकादशी के दिन चावल खाने से अगले जन्म में कीड़े-मकोड़े की योनि मिलती हैं। गेहूं, जौ, मक्का, बाजरा, अरहर, मूंग, मसूर, चना, उड़द आदि सभी वर्जित हैं। प्याज और लहसुन तामसिक माने जाते हैं इसलिए इस दिन इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
पारण के नियम
योगिनी एकादशी के व्रत रखने वाली महिलाएं द्वादशी तिथि पर हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत का पारण करें, पहले भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद जैसे तुलसी दल युक्त जल या फल का सेवन करें, फिर सात्विक भोजन ग्रहण करें। एकादशी के व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि की शाम से ही शुरू कर देना चाहिएदशमी को भी तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
इन बातों का रखें खास ध्यान
एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करना चाहिए, भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय तुलसी के पौधे को छूना या तुलसी के पत्ते तोड़ना मनाही है इसलिए इसे पूजा के लिए दशमी को ही तोड़ लेने चाहिए।




