नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । हर साल आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाली शारदीय नवरात्रि में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नौ दिनों तक व्रत, उपवास, घटस्थापना, दुर्गा अर्चना और कन्या पूजन जैसे अनुष्ठानों के साथ यह पर्व आस्था, शक्ति और भक्ति का महापर्व बन जाता है।
नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति और आस्था का महान उत्सव है। मान्यता है कि मां दुर्गा की साधना से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मकता दूर होती है। इस साल 22 सितंबर से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है और खास बात यह है कि माता रानी हाथी पर सवार होकर पधार रही हैं, जो समृद्धि और खुशहाली का शुभ संकेत माना जाता है।
इस बार शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर, सोमवार से हो रहा है। मान्यता है कि जब प्रतिपदा रविवार या सोमवार को पड़ती है, तो मां दुर्गा गज (हाथी) पर सवार होकर आती हैं। हाथी पर आगमन को अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पूरे वर्ष सुख-समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली का संदेश देता है।
कलश स्थापना मुहूर्त-
आचार्य के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा की शुरुआत 22 सितंबर को रात 1:23 बजे होगी और यह 23 सितंबर रात 2:55 बजे तक रहेगी। ऐसे में नवरात्र का आरंभ 22 सितंबर से होगा और इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। शुभ मुहूर्त प्रातः 6:09 से 8:06 बजे तक है। यदि सुबह संभव न हो, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:38 बजे तक घटस्थापना की जा सकती है।
इस साल 10 दिनों के नवरात्र
इस साल शारदीय नवरात्र 9 नहीं, बल्कि 10 दिन तक मनाए जाएंगे, क्योंकि तिथि में वृद्धि हुई है, जिसे अति शुभ और फलदायक माना जाता है। नवरात्रि 22 सितंबर से आरंभ होंगे। इस दौरान अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन होता है, जबकि दशमी के दिन रावण दहन का पावन अनुष्ठान संपन्न होता है
10 दिनों के नवरात्र क्यों?
इस वर्ष श्राद्ध पक्ष में एक तिथि का क्षय और नवरात्र में एक तिथि की वृद्धि होने के कारण शारदीय नवरात्र 9 दिन के बजाय 10 दिन तक मनाए जाएंगे। विशेष रूप से इस बार चतुर्थी तिथि में वृद्धि हो रही है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है। इससे नवरात्र का प्रभाव पूरे वर्ष सकारात्मक और लाभकारी रहेगा।





