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Saturday, March 7, 2026
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महाशिवरात्रि‍ व्रत में खाएं सिर्फ फलाहार, इन चीजों का रखें परहेज, जानें व्रत का सही नियम

शिवभक्‍त महाशिवरात्रि का व्रत दो तरह से रखते हैं। कुछ निर्जला व्रत तो कुछ फलाहार व्रत रखते हैं। तो आइये जानते हैं इस व्रत में क्‍या खाना चाहिए और किन-किन चीजों से परहेज रखना चाहिए।

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्क। महाशिवरात्रि का पर्व आराध्‍य देव भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भक्‍त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भोलेनाथ को प्रसन्‍न करने के लिए विशेष अनुष्‍ठान, अभिषेक व पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं। धार्मिक ग्रंथों में शिवरात्रि व्रत का विशेष महत्‍व बताया गया है, वहीं इस व्रत को लेकर विशिष्ट नियमों का उल्लेख भी यहां मिलता है। तो आइये जानते हैं इस व्रत में क्‍या खाना चाहिए और किन-किन चीजों से परहेज रखना चाहिए।

Mahashivratri 2025: फलाहार को लेकर नियम

शिवभक्‍त महाशिवरात्रि का व्रत दो तरह से रखते हैं। कुछ निर्जला व्रत तो कुछ फलाहार व्रत रखते हैं। निर्जला व्रत में पूरे दिन और रात बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखा जाता है। वहीं फलाहार व्रत में दिन और रात के समय फलाहार किया जा सकता है। फलाहारी व्रत में दूध, फल, मेवे और कुछ विशेष प्रकार के आहार का सेवन किया जाता है। 

फलाहार व्रत में खा सकते हैं ये चीजें 

-सिंघाड़े के आटे का हलवा

-कुट्टू के आटे से बनी कचौड़ी या पूरी

-सिंघाड़े के आटे की पकौड़ी

-आलू दम (सेंधा नमक के साथ बना हुआ)

-कुट्टू के चावल की खीर

-फल एवं सूखे मेवे

-मिठाई (बिना अनाज वाली जैसे मखाने की खीर, नारियल बर्फी आदि)

-दूध व दूध से बने पदार्थ

-ठंडाई (बादाम, सौंफ, गुलाब, काली मिर्च आदि मिश्रित पेय)

इन चीजों का परहेज जरूरी 

महाशिवरात्रि व्रत के दौरान और इस पवित्र दिन मांस, मछली या शराब का सेवन करना पूर्णतः निषिद्ध माना गया है। वहीं प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये मानसिक एवं आध्यात्मिक शुद्धता में बाधा डालते हैं। इसके अलावा व्रत रखने वाले भक्तों को गेहूं, चावल और अन्य अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए तथा व्रतधारियों को संयमित रहते हुए ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए।

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी। भगवान विष्णु व ब्रह्मा ने शिवलिंग की पूजा कर इसका महत्व स्वीकार किया था। इसलिए इस दिन भोलेनाथ के शिवलिंग स्‍वरूप का अभिषेक व पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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