नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2026 की मकर संक्रांति 14 जनवरी को पड़ रही है और इस बार यह षट्तिला एकादशी तिथि के साथ संयोग में है। सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत मकर संक्रांति का महत्व बढ़ा देती है। शास्त्रों में इस दिन को देवताओं का दिन कहा गया है और यह दिन विशेष रूप से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने का खास महत्व है, लेकिन एकादशी के कारण इस बार अन्न का दान वर्जित माना गया है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
एकादशी तिथि में अन्न दान वर्जित
षट्तिला एकादशी पर अन्न का सेवन और दान वर्जित होता है, खासतौर पर चावल और खिचड़ी का दान नहीं किया जा सकता। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चावल का दान करना और खिचड़ी का भोग लगाना वर्जित है। ऐसे में यदि आप इस बार मकर संक्रांति पर पारंपरिक खिचड़ी और चावल दान करना चाहते हैं तो उसे अलग तिथि पर करना शुभ रहेगा।
कब करें खिचड़ी और चावल का दान
शास्त्रों के अनुसार, 14 और 15 जनवरी को अन्न दान वर्जित होने के कारण खिचड़ी और चावल का दान इस दिन नहीं किया जा सकता। इसके बजाय 17 जनवरी शनिवार को सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि के दिन खिचड़ी पकाना और चावल दान करना शुभ रहेगा। इस दिन दान पुण्य का योग बनता है और ग्रह दोष भी कम होंगे।
इस बार मकर संक्रांति पर क्या दान करें
इस बार आप मकर संक्रांति पर चावल और खिचड़ी के बजाय तिल, गुड़ और मूंगफली का दान कर सकते हैं। तिल का दान विशेष रूप से पाप नाशक और सूर्यदेव को प्रसन्न करने वाला माना जाता है। तिल से बनी चीजें जैसे तिल के लड्डू, गुड़ और मूंगफली का दान करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
दान और भोग के शुभ अवसर
यदि आप खिचड़ी का भोग या दान करना चाहते हैं तो उसे 17 जनवरी को करें। इस दिन सप्तमी के बाद अष्टमी तिथि में खिचड़ी बनाना और चावल दान करना शास्त्र अनुसार उचित है। इस तिथि में किया गया दान पुण्य बढ़ाता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है।
मकर संक्रांति 2026 में एकादशी का संयोग होने से खिचड़ी और चावल दान में शास्त्रीय पेंच आया है, लेकिन इस बार तिल, गुड़ और मूंगफली का दान करना और 17 जनवरी को खिचड़ी का भोग करना शुभ रहेगा। इस प्रकार आप परंपरा और धार्मिक नियमों दोनों का पालन करते हुए मकर संक्रांति का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।





