नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सोमवार को IRCTC होटल घोटाले मामले की सुनवाई हुई। मामले में अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों पर औपचारिक आरोप तय कर दिए। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले को नया मोड़ दे दिया है।
यह मामला इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) के रांची और पुरी में स्थित दो होटलों के आवंटन से जुड़ा है। ऐसे में अब बड़ा सवाल उठता है कि अगर आरजेडी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर केस चलता रहा तो क्या वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाग ले पाएंगे या नहीं।
आरोपों को कोर्ट ने सहीं ठहराया
कोर्ट ने आरोप तय करते हुए तेजस्वी यादव और अन्य पर भ्रष्टाचार, साजिश और धोखे जैसे अपराधों के तहत मुकदमा चलाने योग्य ठहराया है। अदालत ने कहा कि ठेका प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और लाभार्थी कंपनी को टेंडर जीतने में मदद की गई। आरोप है कि इसके बदले लालू परिवार को भ्रष्ट तरीके से जमीन जैसी संपत्तियां दी गईं।
अब जानिए क्या है पूरा मामला?
यह मामला उन टेंडरों से जुड़ा है जो रांची और पुरी में स्थित दो IRCTC होटलों के रखरखाव और संचालन के लिए जारी किए गए थे। आरोप है कि इन टेंडरों को निजी कंपनी सुजाता होटल्स को राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग कर अनियमित तरीके से दिलाया गया था।
CBI के अनुसार, इन टेंडरों के बदले लालू परिवार को पटना में कीमती जमीन दी गई, जो कथित तौर पर गैर-बाजार दर पर हस्तांतरित की गई थी। यह जांच 2017 में शुरू हुई, जब CBI ने प्राथमिकी दर्ज की थी और बाद में आरोपपत्र तैयार किया गया।
क्या तेजस्वी यादव लड़ सकते है बिहार का चुनाव?
हां, तेजस्वी यादव अभी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। अभी केवल उन पर आरोप तय किए गए हैं, सजा नहीं सुनाई गई है। भारतीय कानून के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (representation of the people act 1951) की धारा 8 के तहत केवल तब कोई व्यक्ति गंभीर अपराध में दोषी ठहराकर दो साल या उससे अधिक की सजा पाए, तभी वह चुनाव लड़ने या निर्वाचित होने के अधिकार से वंचित हो सकता है।
इसलिए फिलहाल तेजस्वी यादव की चुनाव लड़ने की पात्रता बरकरार है। हालांकि, यदि अदालत उन्हें दोषी ठहराती है और अधिकतम सजा सुनाती है, तो वे अस्थायी या स्थायी रूप से अयोग्य हो सकते हैं। वही, इधर बिहार में विभानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीति दलों में सीट शेयरिंग और चुनावी रणनीति को लेकर लगातार बैठकों को दौर जारी है।





