नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क। चुनावी साल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच इसे लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। मंगलवार को बीजेपी के फायरब्रांड विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने राज्य में जल्द से जल्द UCC लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लिए एक समान नागरिक कानून होना चाहिए। उनके अनुसार, अलग-अलग धर्मों के लिए अलग कानून होना राष्ट्र की एकता और अखंडता के खिलाफ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक विशेष समुदाय से लोग डरे हुए हैं।
UCC पर JDU की प्रतिक्रिया
UCC को लेकर बिहार की राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है। बीजेपी विधायक की ओर से राज्य में जल्द UCC लागू करने की मांग के बाद जेडीयू ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। जेडीयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद ने स्पष्ट कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में कोई भी समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा कि राज्य में UCC लागू नहीं होगा और एनडीए के नेताओं को इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए।
अरविंद निषाद ने कहा कि हमारे राज्य में सभी समुदाय आपसी सद्भाव के साथ रह रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने दोहराया कि देश में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग कानून होना एकता और अखंडता के खिलाफ है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय का नाम लिए बिना कहा कि एक विशेष समुदाय से लोग डरे हुए हैं, जो समाज में भेदभाव को बढ़ावा देता है।
गौरतलब है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) एक ऐसा प्रस्तावित कानून है जिसका उद्देश्य धर्म, जाति, लिंग या समुदाय के आधार पर किसी प्रकार के कानूनी भेदभाव को समाप्त करना है। इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू किया जाएगा। यह मुद्दा ऐसे समय पर गरमाया है जब बिहार में आगामी चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं और एनडीए गठबंधन अपनी आंतरिक एकता को बनाए रखने की कोशिश में लगा है।
चुनावी साल में फिर गरमाया UCC का मुद्दा
बिहार में चुनावी माहौल के बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने राज्य में जल्द से जल्द UCC लागू करने की मांग उठाते हुए कहा है कि किसी भी धर्म या समुदाय के लिए अलग कानून नहीं होना चाहिए। विधायक का कहना है कि जब पूरे देश में आपराधिक कानून (क्रिमिनल लॉ) एक है, तो फिर सिविल कानून भी समान क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि धर्म के आधार पर कुछ वर्गों को मिली छूट समाज में असमानता और सामाजिक विषमता को बढ़ावा देती है, जो देश की एकता और सामाजिक समरसता के लिए खतरा है।





