नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ शिवसेना और एनसीपी के महायुति गठबंधन को राज्य की जनता से अपने लिए मुफीद माना है। जनता ने फिर एक बार सत्ता उसे सौंप दी है। इस सफलता का श्रेय यहां मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना को दिया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह योजना शिंदे सरकार के लिए गेम चेंजर साबित हुई है। सरकार ने 2024-25 के दौरान इस बहन योजना के लिए 46,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।
कुछ घंटे पहले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे ने भी भारी जनादेश के लिए महाराष्ट्र के लोगों का आभार व्यक्त किया और भारी समर्थन के लिए बहिन और भाऊ को विशेष धन्यवाद दिया है । उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, “हमने पिछले ढाई साल में जो काम किया है, अब हम अगले पांच साल में उससे ओर बेहतर करने का प्रयास करेंगे।” उन्होंने दावा किया, “यह एक बड़ा जनादेश, भारी जीत और ऐतिहासिक जीत है।” महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी एक्स पर लिखा, “एक हैं तो सुरक्षित हैं! मोदी है तो मुमकिन है!”
नारी शक्ति ने महायुति को दिया भारी समर्थन
महायुति ने पूरे राज्य में समारोह आयोजित करके इस योजना को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए थे । 2.36 करोड़ से अधिक पात्र महिला लाभार्थियों में से प्रत्येक को 7,500 रुपये जुलाई से नवंबर तक पांच महीने के लिए 1,500 रुपये प्रत्येक यहां महिलाओं को राज्य की ओर से मिले और उसका यह परिणाम है कि राज्य की नारी शक्ति ने उन्होंने महायुति का भारी समर्थन किया है । अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी प्रतिक्रिया में स्वीकार किया कि इस योजना ने महायुति के लिए चमत्कार किया है, जिसके परिणामस्वरूप शानदार प्रदर्शन हुआ है। संयोग से, एनसीपी मंत्री अदिति तटकरे और उनकी टीम के नेतृत्व वाले महिला और बाल विकास विभाग ने इस योजना को बड़ी सफलता बनाने का प्रयास किया क्योंकि इसे बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से लागू किया गया।
महिला मतदाताओं ने मासिक सहायता राशि को 2,100 रुपये करने के महायुति के आश्वासन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी अब इसे माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कई रैलियों के दौरान घोषणा की कि सत्ता में आने के बाद महायुति सरकार मासिक सहायता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 3,000 रुपये तक करेगी। उल्लेखनीय है कि नवंबर में कुल 9.70 करोड़ मतदाताओं में से 6.40 करोड़ मतदाताओं ने यहां हुए विधानसभा चुनाव में अपने वोट डाले हैं। महायुति का महिला-समर्थक अभियान कारगर रहा और महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान करने आईं। 6.40 करोड़ मतदाताओं में से 3.06 करोड़ महिलाएं और 3.34 करोड़ पुरुष थे।
महाविकास अघाड़ी की महालक्ष्मी योजना से खुश नही दिखीं महिलाएं
दूसरी ओर, महाविकास अघाड़ी द्वारा महालक्ष्मी योजना के तहत 4,000 रुपये मासिक सहायता देने के वादे ने महिला मतदाताओं को ज्यादा उत्साहित नहीं किया। महिला मतदाताओं ने बड़ी संख्या में मतदान करके दिखाया कि वे महायुति द्वारा अपने वादे को पूरा करने और सत्ता में आने के बाद इस योजना को जारी रखने के संकल्प से खुश हैं। वे महा विकास अघाड़ी की 4,000 रुपये की सहायता का इंतजार करने के लिए तैयार नहीं। वहीं, महाविकास अघाड़ी ने बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी, जो 2.30 लाख करोड़ रुपये और सार्वजनिक ऋण 7.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताया गया, और चेतावनी दी कि राज्य एक बड़े वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। लेकिन महाराष्ट्र की जनता में यह मामला चुनावों के दौरान कोई मुद्दा नहीं बन पाया और इसलिए इसने एमवीए के पक्ष में कुछ काम नहीं किया, क्योंकि महिला मतदाताओं और अन्य आम जनता को अपने राज्य की वर्तमान स्थिति को लेकर यह विश्वास है कि राज्य की शिंदे सरकार आंतरिक रूप से और केंद्र के मजबूत समर्थन के साथ आवश्यक संसाधन जुटाने की स्थिति में है और महाराष्ट्र पर कोई आर्थिक संकट नहीं, यह महाविकास अघाड़ी का जुमला है।
सफलता के मुख्य कारण सरकार के उल्लेखनीय विकास कार्य है-BJP
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति को मिले प्रचंड जनादेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह विचारधारा और सिद्धांतों के लिए जनादेश है, जिसे भाजपा लगातार राजनीतिक चर्चा में लाने का प्रयास करती है। महाराष्ट्र के नतीजों त्रिवेदी ने कहा, “महाराष्ट्र के लोगों ने स्पष्ट रूप से वंशवाद की राजनीति पर विचारधारा को चुना है।” उन्होंने आगे कहा, “महाराष्ट्र में अब तक जो नतीजे हम देख रहे हैं, वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और महायुति के पक्ष में हैं। भाजपा राज्य में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ओर अग्रसर है। इस सफलता के मुख्य कारण सरकार द्वारा किए गए उल्लेखनीय विकास कार्य, सरकार के अथक प्रयास और समर्पण, राज्य स्तर पर उत्कृष्ट नेतृत्व और सबसे महत्वपूर्ण रूप से लोगों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विश्वसनीयता है।” भाजपा नेता ने आगे जोर दिया कि यह चुनाव “विचार की विरासत” और “परिवार की विरासत” के बीच निर्णायक लड़ाई थी। उन्होंने कहा, “हम अक्सर ‘विचार परिवार’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यह चुनाव यह तय करने के लिए था कि जनादेश आदर्शों की विरासत को मिलेगा या परिवार की विरासत को। महाराष्ट्र के लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है-उन्होंने आदर्शों की विरासत को आशीर्वाद दिया है, जबकि उन लोगों को खारिज कर दिया है, जिन्होंने सिद्धांतों को त्याग दिया और सब कुछ परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दिया।”




