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Tuesday, April 7, 2026
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BMC Election : उद्धव ठाकरे के फैसले से पार्टी के इन नेताओं की दबी सांसें, BMC चुनाव में टिकट कटने का डर

बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने शिवसेना (UBT) के भीतर हलचल पैदा कर दी है। पार्टी के नए चुनावी निर्णय लागू होने पर कई नेताओं के टिकट कटने की संभावना है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के ऐलान से पहले उद्धव ठाकरे की नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपने नए नेताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी ने आगामी चुनाव में उम्मीदवारों की सूची और जिम्मेदारियों को लेकर कई नई चुनौतियां पेश की हैं, जिससे स्थानीय राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की पार्टी आगामी नगर निकाय चुनाव में बृहन्मुंबई महानगर पालिका के कुछ वार्ड्स में उन पार्षदों के टिकट काट सकती है जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है। यह कदम पार्टी की युवा नेताओं को बढ़ावा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

उद्धव ठाकरे रणनीति हलचल तेज

सूत्रों के मुताबिक, महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना (ठाकरे गुट) नए चेहरों को उम्मीदवारी में तरजीह देगी। वहीं, 60 साल से ऊपर के पुराने कॉर्पोरेटर्स इस बार उम्मीदवार नहीं बनाए जाएंगे, जिससे पार्टी में युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा।

इस कदम से उद्धव ठाकरे की शिवसेना में भारी उथल-पुथल की संभावना है। वरिष्ठ पार्षद यदि नाराज हुए, तो वे पार्टी छोड़कर अलग राजनीतिक रास्ता अपना सकते हैं, जिससे आगामी चुनावों में तनाव बढ़ सकता है।

70% नए चेहरों को मौका दे सकती शिवसेना?

अगर यह फैसला लागू हुआ तो ठाकरे की पार्टी बीएमसी चुनावों में कम से कम 70 प्रतिशत नए चेहरे उम्मीदवार उतारेगी। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और उद्धव की शिवसेना चुनावी योजना तैयार कर रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, वार्ड के उम्मीदवार तय करते समय उनके अनुभव और पार्टी में योगदान को ध्यान में रखते हुए उनकी राय भी ली जाएगी। इससे नई पीढ़ी को अवसर मिलेगा और पार्टी में युवा नेतृत्व की भागीदारी बढ़ेगी।

गठबंधन को लेकर बैठकें जारी 

हालांकि, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अभी तक गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन दोनों पार्टियों के नेताओं की संयुक्त बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में हर वार्ड में दोनों पार्टियों की ताकत और प्रभाव को देखते हुए सीट शेयरिंग पर चर्चा की गई है।

2017 के नगर निगम चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं। हालांकि, कई पुराने पार्षद अब शिंदे सेना में शामिल हो चुके हैं, इसलिए इस बार उनकी जगह नए चेहरों को मैदान में उतारा जा सकता है।

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