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Friday, March 27, 2026
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स्टार पावर सिर्फ शुरुआती ध्यान, अंत में कंटेंट ही किंग….Kannappa के स्टारकास्ट को लेकर बोले-Vishnu Manchu

अभिनेता विष्णु मांचू इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘कन्नप्पा’ को लेकर चर्चाओं में बने हुए है, जो उनकी फिल्म इस हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अपने दमदार अभिनय से फैंस का दिल जीतनेवाले अभिनेता विष्णु मांचू इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘कन्नप्पा’ को लेकर काफी चर्चाओं में बने हुए हैं।और ऐसा इसलिए क्योंकि इस मूवी की स्टारकास्ट काफी सुर्खियों में है। जिसे लेकर एक्टर विष्णु मांचू ने इसका कारण बताया है। मुकेश कुमार सिंह के निर्देशन में बनी इस पौराणिक फिल्म में अक्षय कुमार, प्रभास और मोहनलाल जैसे बड़े एक्टर्स खास रोल में नजर आएंगे। जो आनेवाले हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। जाने क्या कहा, एक्टर-प्रोड्यूसर विष्णु मांचू ने?

2014 में शुरू सफर अब जाकर होगा खत्म

बता दे, एक्टर-प्रोड्यूसर विष्णु मांचू की फिल्म ‘कन्नप्पा’जो इस हफ्ते सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। जिसे मुकेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया है। इस पौराणिक फिल्म में अक्षय कुमार, प्रभास और मोहनलाल जैसे बड़े एक्टर्स खास किरदार में नजर आनेवाले है। एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में विष्णु ने माना कि, किसी भी फिल्म की लिए स्टार पावर सिर्फ शुरुआती ध्यान खींच सकती है, लेकिन अंत में कंटेंट ही किंग होता है। विष्णु ने फिल्म को लेकर की और भी बात कही जिसमें उन्होनें बताया कि कैसे, यह सफर 2014 में शुरू हुआ था। जब एक लेखक मेरे घर आए और हमने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की। 

कन्नप्पा’ जैसे प्रोजेक्ट को करने अलग-अलग देशों में लोकेशन फाइनल 

कन्नप्पा’ जैसे प्रोजेक्ट को करने के सवाल पर विष्‍णु ने बताया, जब मैंनें लेखक से इस कहानी को सुना तब ही मुझे इसकी कहानी इतनी पसंद आई कि, मैंने तय कर लिया था कि ये फिल्म मुझे बनानी है। इसके बाद हर स्टेज मुझे आज भी याद है। रिसर्च से लेकर अलग-अलग देशों में जाकर लोकेशन फाइनल करना। अब जब फिल्म रिलीज के करीब है, तो ये मेरी जिंदगी का खास पल है। मैनें इस फिल्म को कैसे जीया हूं। 

इस फिल्म में लगभग 10 साल लगाए 

विष्‍णु ने बताया, अगर कहूं कि बॉक्स ऑफिस की परवाह नहीं है, तो ये झूठ होगा। क्योंकि, मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक प्रार्थना है यानी पैसा जो बेहद जरूरी है, लेकिन इसलिए नहीं कि अमीर बनना है, बल्कि इसलिए कि ऐसी कहानियां बता सके, जो इतिहास और विश्वास से जुड़ी हों। जैसें, ‘कन्नप्पा’ अनकहे हीरोज की कहानी है, जो हमारे कल्चर का हिस्सा हैं लेकिन पर्दे पर कभी नहीं आए। मैं चाहता हूं कि हमारा इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, सिनेमा में भी जिंदा रहे।  

साउथ से लेकर बॉलीवुड स्टार्स शामिल

 

जब मैंने फिल्म लिखना शुरू किया, तो सोचा कि अगर भाषा की कोई सीमा न हो, तो मैं किन चेहरों को इन देवताओं के रूप में देखना चाहूंगा। तभी अक्षय, प्रभास, मोहनलाल और काजल जैसे नाम सामने आए और खुशकिस्मती से वो सब इसका हिस्सा बन भी गए। इनका आना सिर्फ स्टार पावर के लिए नहीं था, बल्कि भारत की विविधता और एकता को दिखाने का एक तरीका था। यह सिर्फ एक रीजनल फिल्म नहीं, बल्कि पूरे देश की सांझा विरासत की कहानी है जिसमें आपको भारत के हर कोने की झलक देखनें को मिलेगी। 

इस फिल्म में स्टार पावर के साथ फिल्म का कंटेंट भी मायने रखता है 

अगर सच कहूं तो, आज के समय में स्टार पावर सिर्फ आपको दरवाजे तक ले जाती है। अंदर कौन टिकेगा, वो तय करता है कंटेंट यानी आपके फिल्म की कहानी। अब इस फिल्म को ले लीजिए, प्रभास, अक्षय कुमार जैसे नाम आपकी फिल्म को एक बड़ी ओपनिंग दे सकते हैं, ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन अगर कहानी में दम नहीं है, तो दर्शक वापस लौट जाऐगें । टिकेंगे नहीं। दर्शक तभी लौटते हैं जब कहानी उनके दिल को छूती है। यही मेरी कोशिश रही है कि कंटेंट ही मेरा असली स्टार बने। ऑडियंस आज बहुत स्मार्ट है। उन्हें दिखावा नहीं, सच्चाई चाहिए। तो हां, स्टार पावर एक टॉर्च की तरह है, जो रोशनी देती है, लेकिन रास्ता तो कहानी ही तय करती है।

प्रभास और मोहनलाल ने ‘कन्नप्पा’ को मैनें खुद उन्हें चेक भेजा

एक्टर-प्रोड्यूसर विष्णु मांचू की फिल्म ‘कन्नप्पा’ में ये सिर्फ कास्टिंग नहीं थी, ये एक सोच का नतीजा था। जब मैंने फिल्म लिखना शुरू किया, तो सोचा कि अगर भाषा की कोई सीमा न हो, तो मैं किन चेहरों को इन देवताओं के रूप में देखना चाहूंगा। हां ये भी बिल्कुल सच है जिसे कहते है सच्ची श्रद्धा। जब मैंने प्रभास और मोहनलाल सर को उनके किरदार सुनाए तो उन्होंने स्क्रिप्ट पढ़ी और बिना एक सेकंड सोचे बोले, ‘हम करेंगे। इसके लिए उन्होंने कोई फीस नहीं मांगी। लेकिन मेरे लिए ये सिर्फ एक डील नहीं थी, सम्मान का मामला था। इसलिए मैंने खुद उन्हें चेक भेजा, क्योंकि जितनी इज्जत उन्होंने दी, उतनी लौटाना मेरा फर्ज था।

ऑडियंस हर तरह की नई कहानियों को एक्सप्लोर कर रही 

आज जब ऑडियंस हर तरह की नई कहानियों को देखं रही है उसे ढूढ़ रही है, लेकिन कोई कोरिया, जापान या चीन से ये सवाल नहीं करता, जबकि वो बार-बार अपनी संस्कृति को सिनेमा में सजाते है। और दुनिया वाहवाही करती है। तो जब हम भारत में अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश करते हैं, तो सवाल क्यों उठते हैं? जो हमारी असली पहचान है। हमारी पौराणिक कहानियां सिर्फ बीते समय की बातें नहीं, वे हमारी आत्मा से जुड़ी हैं। इसलिए तो, ‘कन्नप्पा’ जैसी फिल्में इसलिए बनती हैं ताकि इतिहास सिर्फ किताबों में न रहे, बल्कि स्क्रीन पर सांस ले।

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