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Tuesday, March 17, 2026
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New Labour Rule: ग्रेच्युटी, मिनिमम वेज, ओवरटाइम और WFH पर बड़ा फैसला; नौकरीपेशा लोगों की हुई बल्ले-बल्ले!

सरकारी नए चार लेबर कोड लागू किए गए हैं, जो मिनिमम वेज, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और WFH को कानूनी मान्यता देते हैं। इन बदलावों से 40 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के अधिकार मजबूत होंगे।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश में कामकाज की दुनिया में 21 नवंबर (शुक्रवार) का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। जहां सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिनका मकसद कंपनियों का काम आसान करना और साथ ही 40 करोड़ से अधिक कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करना है। ये नए नियम कर्मचारियों की सुरक्षा, वेतन, काम के घंटे, वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) और ग्रेच्युटी के मामले में कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव लेकर आए हैं। 

कोड का नाम मुख्य बदलाव (नौकरीपेशा के लिए)

1. वेज कोड (वेतन)- पूरे देश में मिनिमम वेज का अधिकार; ओवरटाइम पर डबल पे अनिवार्य; भर्ती या सैलरी में लिंग आधारित भेदभाव वर्जित।

2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड-1 साल में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का हक; WFH को कानूनी मान्यता; हड़ताल के लिए 14 दिन का नोटिस अनिवार्य।

3. सोशल सिक्योरिटी कोड-गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों को फायदा; ESIC अब पूरे देश में लागू; ऑफिस आते-जाते दुर्घटना होने पर ऑफिस से जुड़ा हादसा माना जाएगा।

4. सेफ्टी और वर्किंग कंडीशंस कोड-सालाना फ्री हेल्थ चेकअप अनिवार्य; रोज़ाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम की सीमा; महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति सुरक्षा इंतज़ाम के साथ।

1. कोड 1: वेज कोड (सैलरी और वेतन)

देश के हर कर्मचारी को मिनिमम वेज पाने का अधिकार मिलेगा। सरकार एक ‘फ्लोर वेज’ तय करेगी, जिसके नीचे कोई राज्य न्यूनतम वेतन नहीं रख सकेगा।कंपनियों के लिए ओवरटाइम पर अब कर्मचारियों को डबल पे देना अनिवार्य होगा।महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के साथ भर्ती या सैलरी में भेदभाव पूरी तरह वर्जित हो गया है।

2. कोड 2: इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (नौकरी की सुरक्षा)

फिक्स्ड टर्म कर्मचारी अब सिर्फ 1 साल में ही ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। WFH को कानूनी मान्यता: सर्विस सेक्टर में वर्क-फ्रॉम-होम को कानूनी मान्यता दे दी गई है, जिससे वर्किंग पैटर्न में लचीलापन आएगा। छंटनी (Layoff) और कंपनी बंद करने के लिए अब कर्मचारियों की सीमा 300 रखी गई है।

3. कोड 3: सोशल सिक्योरिटी कोड (सामाजिक सुरक्षा)

गिग वर्कर (Gig Worker), प्लेटफॉर्म वर्कर और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) की सुविधा अब पहले की तरह सिर्फ अधिसूचित क्षेत्रों तक सीमित न रहकर पूरे देश में लागू होगी।घर से ऑफिस आते-जाते समय अगर कोई दुर्घटना होती है, तो उसे भी अब ऑफिस से जुड़ा हादसा माना जाएगा।

4. कोड 4: सेफ्टी और वर्किंग कंडीशंस कोड (सुरक्षा और स्वास्थ्य)

हर कर्मचारी का साल में एक बार फ्री हेल्थ चेकअप कराना कंपनियों के लिए जरूरी होगा।रोज़ाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम का नियम तय किया गया है। महिलाओं को भी नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते उन्हें जरूरी सुरक्षा इंतज़ाम दिए जाएं।अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया जाएगा।

क्या है ‘फ्लोर वेज’ और क्यों है यह इतना महत्वपूर्ण?

फ्लोर वेज (Floor Wage) एक न्यूनतम वेतन सीमा है जिसे केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। ‘फ्लोर वेज’ की अवधारणा को वेतन कोड 2019 (Code on Wages, 2019) के तहत पेश किया गया है।

 फ्लोर वेज का उद्देश्य

फ्लोर वेज वह न्यूनतम मानक वेतन है जिसके नीचे देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) रखने की अनुमति नहीं होगी।इसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश में श्रमिकों के वेतन में मौजूद क्षेत्रीय असमानता को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि हर कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त वेतन मिले, चाहे वह किसी भी राज्य में काम करता हो।

केंद्र सरकार विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों (जैसे शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों) के लिए अलग-अलग फ्लोर वेज निर्धारित कर सकती है। हालांकि, कोई भी राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी तय करते समय फ्लोर वेज से नीचे नहीं जा सकती है। राज्य या केंद्र शासित प्रदेश हमेशा फ्लोर वेज से अधिक न्यूनतम वेतन निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस फ्लोर वेज को तय करते समय श्रमिकों के जीवन-यापन की लागत (Cost of Living), भौगोलिक स्थिति और काम की प्रकृति जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है।फ्लोर वेज श्रमिकों को एक सुरक्षा जाल (Safety Net) प्रदान करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि देश के सबसे गरीब और कम वेतन वाले क्षेत्रों में भी उनका शोषण न हो और उन्हें एक निश्चित आय प्राप्त हो सके।

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