नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क । Skype के दुनिया भर में लाखों यूजर्स है। पॉपुलर वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म को कंपनी ने हमेशा के लिए बंद करने की घोषण की है। इस बीच माइक्रोसॉफ्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए स्काइप (Skype ) को बंद करने का ऐलान किया है। ये फैसला कई कारणों से लिया गया है, जिनमें कंपटीशन, टेक्नोलॉजी में बदलाव और कंपनी की पॉलिसी प्रायोरिटी शामिल हैं। आज हम आपको इस खबर में स्काइप को बंद करने के पीछे की पूरी कहानी बताएंगे।
क्या है Skype की हिस्ट्री?
Skype 2003 में लॉन्च किया गया था। यह इंटरनेट के जरिए मुफ्त वॉयस और वीडियो कॉलिंग की सुविधा देता है। ये उस समय इंटरनेट की दुनिया में क्रांतिकारी कदम था। साल 2005 में eBay ने इसे $2.6 बिलियन (करीब 22 हजार करोड़ रुपये) में टेकओवर किया था, और 2011 में माइक्रोसॉफ्ट ने इसे $8.5 बिलियन (करीब 7100 करोड़ रुपये) में खरीद लिया था। इसके बाद इसकी पॉपुलेरिटी में भारी गिरावट देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक, Skype के यूजर्स की संख्या 23 मिलियन थी।
प्रतिस्पर्धा और टेक्नोलॉजिकल बदलाव
Skype पर कंपटीशन और टेक्नोलॉजी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इसका मुकाबला अब Zoom, Google Meet, WhatsApp, और Microsoft Teams जैसी प्लेटफार्म करने लगे है। ये ऐप ज्यादा यूजर फ्रैंडली और बेहतर फीचर्स के लिए जाने जाते है। Skype को खासतौर पर डेस्कटॉप के लिए डिजाइन की गया था। अब स्मार्टफोन के जमाने में ये ज्यादा काम का नहीं रहा।
माइक्रोसॉफ्ट की पॉलिसी: Teams पर फोकस
स्काइप को ब्लॉक करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने Teams नाम का एक नया ऐसा ही प्लेटफॉर्म तैयार किया है। जहां लोग आपस में बातचीत और वीडियो कॉल कर सकते हैं, साथ मिलकर काम कर सकते हैं और जरूरी फाइलें या जानकारी भी एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकते हैं। ये सब कुछ एक ही जगह पर की जा सकती है। Skype के ज्यादातर फीचर्स और टूल्स जैसे मीटिंग होस्टिंग, कैलेंडर मैनेज, और कम्युनिटी फीचर्स ऑफर करता है। इसलिए, कंपनी ने Skype को बंद करने का फैसला लिया और Teams पर ज्यादा ध्यान देने का निर्णय लिया।
यूजर्स के पास हैं दो ऑप्शन
स्काइप ऐप बंद होने पर अब यूजर्स के पास दो विकल्प मौजूद है। कंपनी ने ऑप्शन के तौर यूजर्स को दो अवसर दिए है। माइक्रासॉफ्ट ने एक नया प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो Teams नाम दिया है। जिसमें आप स्काइप के सारी फाइलें Teams में लॉग इन कर सकते है।
Microsoft Teams में माइग्रेट करें: यूजर्स अपने मौजूदा Skype क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके Teams में लॉग इन कर सकते हैं। इससे उनके Skype के चैट, कॉन्टैक्ट और कंवर्सेशन ऑटोमेटिकली Teams में ट्रांसफर हो जाएंगे।
डेटा ट्रांसफर करें: जो यूजर्स Teams में माइग्रेट नहीं करना चाहते, वे अपने Skype डेटा जैसे चैट, कॉन्टेक्ट और कॉल हिस्ट्री को ट्रांसफर कर सकते हैं।




