नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारत लंबे समय से प्रतिभाशाली पेशेवरों और श्रमिकों को विदेश भेजने वाला बड़ा देश रहा है। बेहतर सैलरी, उच्च जीवन स्तर, आधुनिक सुविधाएँ और करियर ग्रोथ यहां के युवाओं को आकर्षित करती हैं। आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र में भारतीयों की भारी मांग रहती है। यही वजह है कि लाखों भारतीय विदेशों में नौकरी करने जाते है।
भारतीयों की विदेश में नौकरी की चर्चा होते ही सबसे पहले अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देश याद आते हैं। लेकिन अब रुझान बदल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, आयरलैंड और इटली जैसे यूरोपीय देशों में भी भारतीय पेशेवरों और छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
अब सवाल ये है कि दुनिया के कौन से देश भारतीयों को सबसे ज्यादा सैलरी देते हैं, और खासकर अमेरिका के लिए क्यों इतनी मारामारी होती है। भारतीयों के लिए सबसे आकर्षक नौकरी गंतव्य वे देश हैं, जहां सैलरी ऊंची और अवसर असीमित हों। अमेरिका में टेक, हेल्थकेयर और फाइनेंस सेक्टर की मोटी तनख्वाहें ही सबसे बड़ा आकर्षण हैं।
यही वजह है कि वहां पहुंचने की होड़ सबसे ज्यादा है। यूरोप और खाड़ी देशों में भी मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आइए उन देशों के बारे में जानते हैं जहां भारतीयों को सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है और क्यों अमेरिका की और भारतीय रुख करते है।
दुनिया का कौन-सा देश भारतीयों को देता है सबसे ज्यादा सैलरी?
स्विट्जरलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए सपनों का देश माना जाता है। मजबूत अर्थव्यवस्था और उच्च जीवन स्तर के साथ यहां फाइनेंस, बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और वॉच मेकिंग सेक्टर में खूब अवसर हैं। खास बात यह है कि यहां सालाना औसत सैलरी करीब 1.74 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जो युवाओं को बेहद आकर्षित करती है।
एशिया में ऊंची सैलरी के लिहाज से जापान भारतीयों के लिए बेहतरीन विकल्प है। यहां आईटी, सॉफ्टवेयर और रेस्तरां उद्योग में भारतीयों की खास मांग है। यहां पर औसतन सालाना सैलरी करीब 36 लाख रुपये तक पहुंच सकती है, जो इसे आकर्षक बनाती है।
ये देश भी देते हैं भारतीयों को अच्छी सैलरी
आइसलैंड विदेशी कामगारों के लिए सुनहरा मौका बनकर उभरा है। टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भारतीयों की खास मांग है। यहां औसतन सालाना 60 लाख रुपये की सैलरी मिलती है, जो यूरोप के कई देशों से कहीं ज्यादा आकर्षक है।
लक्ज़मबर्ग छोटा देश, लेकिन सैलरी ज्यादा
लक्ज़मबर्ग भले ही यूरोप का छोटा देश हो, लेकिन सैलरी के मामले में बेहद बड़ा आकर्षण है। खासकर बैंकिंग, टेलीकॉम और फाइनेंस सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों को यहां औसतन सालाना 68 लाख रुपये तक की सैलरी मिल सकती है, जो इसे खास बनाती है।
सैलरी के मामले में सिंगापुर और हांगकांग कि स्थिति
हांगकांग एशिया का बड़ा फाइनेंशियल हब है, जहां काम करने वाले भारतीयों को औसतन 4,175 डॉलर यानी करीब 3.51 लाख रुपये महीना मिलता है। वहीं सिंगापुर भी सैलरी के मामले में बेहद आकर्षक है, यहां भारतीय पेशेवरों की औसत आय 4,765 डॉलर यानी लगभग 4 लाख रुपये प्रतिमाह रहती है।
अमेरिका के लिए क्यों मची होड़?
अमेरिका को अवसरों की धरती कहा जाता है, जहां हर साल हजारों भारतीय रोजगार की तलाश में पहुंचते हैं। आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा और बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर में यहां भारतीयों की जबरदस्त मांग है। औसतन सालाना 57 लाख रुपये तक की सैलरी मिलने के कारण अमेरिका में नौकरी पाना भारतीयों के बीच सबसे बड़ी होड़ बन चुका है।
बड़ी कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर का हब
इसी वजह से अमेरिका भारतीय पेशेवरों की पहली पसंद बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों और टेक्नोलॉजी सेक्टर का हब होने के साथ यहां हाई-पेइंग जॉब्स की भरमार है। बेहतर सैलरी, करियर ग्रोथ और ग्लोबल एक्सपोज़र ही भारतीयों को इसकी ओर सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं।
लाइफस्टाइल एक बड़ी वजह
अमेरिका भारतीय पेशेवरों के लिए सिर्फ सैलरी का देश नहीं है। यहां की हाई-स्टैंडर्ड लाइफस्टाइल, उत्कृष्ट हेल्थकेयर और बेहतरीन शिक्षा सुविधाएं भी भारतीयों को बेहद आकर्षित करती हैं, जिससे रोजगार के साथ जीवन स्तर में भी बड़ी सुधार की संभावना मिलती है।




