नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फरवरी की पहली तारीख को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Union Budget पेश करेंगी। यह उनका 8वां बजट होगा। बजट में सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के विकास कार्यों के लिए अपनी योजनाएं सामने रखती है। पर क्या आपने गौर किया है कि बीते कुछ सालों से बजट 1 फरवरी को ही पेश हो रहा है? क्या इसके पीछे कोई खास वजह है?
अरुण जेटली ने तोड़ी परंपरा
दरअसल पहले बजट को फरवरी की आखिरी तारीख यानी 28 फरवरी को पेश करने की परंपरा थी। हालांकि, तब सरकार को उस बजट को इम्प्लिमेंट करने के लिए केवल एक महीने का समय मिलता था। साल 2017 में तब वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली ने इस परंपरा को बदल दिया। उन्होंने फरवरी की आखिरी तारीख की जगह पहली तारीख को बजट पेश करने की परंपरा शुरू की। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि इससे सरकार को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए ज्यादा मिलेगा। केवल एक महीने का समय मिलने पर सरकार और अधिकारियों को हड़बड़ी में काम करना पड़ता था। तब से हर साल फरवरी की पहली तारीख को बजट पेश किया जाता है। इसके साथ ही 2017 में केंद्र सरकार ने रेल बजट को मुख्य बजट में मर्ज कर दिया था।
अटल सरकार में यशवंत सिन्हा ने बदला था बजट का समय
आज़ादी से पहले ब्रिटेन में दोपहर में बजट पेश करने की परंपरा थी, जो कि भारत के लिए शाम का वक्त होता था। तब शाम पांच बजे बजट पेश किया जाता था। आज़ादी के बाद भी इसी व्यवस्था का पालन किया जाता था और शाम 5 बजे बजट पेश किया जाता था। साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने बजट का समय बदला और शाम पांच बजे की जगह 11 बजे बजट पेश करना शुरू किया। इसके पीछे वजह थी कि बजट को ज्यादा से ज्यादा लोग देख सकें।




