नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्होंने लिखा कि कुछ उच्च जातियों के लोग UGC समता समिति कानून 2026 का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उन्हें पारंपरिक अधिकार और विशेषाधिकार हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके पूर्वजों द्वारा कभी शम्वूक का सिर काटा, एकलव्य का अंगूठा काटा, उनकी संताने आज भी SC/ST/OBC समाज के लोगों को शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, हिंसा, अत्याचार, हत्या, बलात्कार, और अन्य सामाजिक असमानताओं का शिकार बन रहे हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस कानून का विरोध करने वाले वर्गों के लिए समानता और समावेशिता एक चुनौती बन गई है और यह दृष्टिकोण उनके “जन्म-सिद्ध अधिकार” के खिलाफ माना जा रहा है। यही वजह से है ये उच्च जातियां यूजीसी समता समिति कानून 2026 का विरोध कर रही है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा “UGC का विरोध करने वाले लोगों के चेहरे गौर से देखो, ये वही लोग हैं जिनके पूर्वजों ने धर्म के नाम पर दान-दक्षिणा और चढ़ावा स्वीकार किया और माल-पुआ हलवा खिलाने की परंपरा निभाई।” स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि ऐसे लोग अब भी समाज में असमानता बनाए रखने और SC/ST/OBC समुदाय के खिलाफ भेदभाव जारी रखने की मानसिकता रखते हैं।
SC/ST/OBC समुदाय से की अपील
स्वामी प्रसाद मौर्य ने SC/ST/OBC समुदाय के लोगों से खास अपील की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की मानसिकता अभी भी पुराने सामाजिक प्रथाओं और भेदभाव पर आधारित है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा “ऐसे लोगों को माल-पुआ हलवा खिलाना और दान-दक्षिणा देना बंद कर दें, उनकी हेकड़ी अपने आप खत्म हो जाएगी और UGC के खिलाफ विरोध भी कम हो जाएगा।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर लगाया आरोप
स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए लाए गए UGC विनियमन कानून के नाम पर SC/ST/OBC समाज के लोगों के साथ धोखा किया गया। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने UGC समता कानून के जरिए SC/ST/OBC समुदाय को खुश दिखाने का ढोंग किया, जबकि ऊंची जातियों से विरोध करवाकर कानून के कार्यान्वयन को रोक दिया। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कानून पर रोक लगवाई गई। पूर्व मंत्री ने इसे “शतरंज की चाल” बताया और कहा, “कानून बनने से SC/ST/OBC खुश, स्टे लगने से उच्च जातियां भी खुश। इस तरह दोनों पक्षों को संतुष्ट करते हुए सरकार ने अपनी चाल चली। भाजपा के इस तरीके से सावधान रहना होगा।”




