नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साहित्य के क्षेत्र में 2025 का नोबेल पुरस्कार हंगरी के सुप्रसिद्ध लेखक लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को दिया जाएगा। स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार शाम 4:30 बजे इसकी आधिकारिक घोषणा की। स्वीडिश एकेडमी ने कहा है कि क्रास्नाहोरकाई की रचनाएं न सिर्फ गहरे प्रभावशाली और दूरदर्शी हैं, बल्कि वे तबाही और डर के माहौल के बीच भी कला की अद्भुत ताकत को उजागर करती हैं। वे मध्य यूरोप की साहित्यिक परंपरा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनकी लेखनी फ्रांज काफ्का और थॉमस बर्नहार्ड जैसे महान लेखकों की छाया में रची गई है।
पहला उपन्यास ‘सैटानटैंगो’ 1985 में प्रकाशित हुआ था
उनका पहला उपन्यास ‘सैटानटैंगो’ 1985 में प्रकाशित हुआ था, जिसने हंगरी के साहित्य जगत में उनका नाम स्थापित किया। यह उपन्यास साम्यवादी शासन के पतन के पहले के हंगरी के एक छोटे से ग्रामीण इलाके के बेसहारा निवासियों की जिंदगी की कहानी है।
विश्व साहित्य में है खास स्थान
स्वीडिश एकेडमी की समिति ने बताया कि क्रास्नाहोरकाई की किताबें दर्शन और समाज के जटिल संकटों को बेबाकी से पेश करती हैं। उनकी लेखनी में मानवता, अराजकता और आधुनिक समाज की चुनौतियां झलकती हैं। उनकी चर्चित कृतियों में ‘सैटानटैंगो’ और ‘द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस’ शामिल हैं, जिन पर फिल्में भी बन चुकी हैं और जो विश्व साहित्य में खास स्थान रखती हैं।
एक छोटे गांव की कठिन जिंदगी को बखूबी बयान करती है
‘द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस’ एक छोटे गांव की कठिन जिंदगी को बखूबी बयान करती है, जो मानव स्वभाव के दोष और गुण दोनों को उजागर करती है। वहीं ‘सैटानटैंगो’ पर बनी 7 घंटे लंबी फिल्म को आलोचकों और दर्शकों से खूब सराहना मिली थी। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 10.3 करोड़ रुपये) की राशि, सोने का मेडल और प्रमाणपत्र दिया जाएगा। यदि पुरस्कार दो या दो से अधिक व्यक्तियों को मिलता है, तो राशि साझा की जाती है। पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में आयोजित होगा। स्वीडिश एकेडमी ने अब तक विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा और साहित्य के लिए पुरस्कारों की घोषणा कर दी है, जबकि बाकी श्रेणियों के विजेताओं की घोषणा शेष है।





