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Sunday, March 29, 2026
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RJ Election: राजस्थान में गुर्जर बढ़ा सकते हैं कांग्रेस की मुश्किलें, पायलट को CM नहीं बनाए जाने से नाराज

Rajasthan Election Live: राजस्थान में 2018 में चुनाव जीतने के बाद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर गुर्जर समाज अब कांग्रेस के खिलाफ लामबंद हो गया है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क/हिस। राजस्थान में 2018 में चुनाव जीतने के बाद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने पर गुर्जर समाज अब कांग्रेस के खिलाफ लामबंद हो गया है। 2018 में पायलट के चेहरे पर कांग्रेस को जीत दिलाने का दावा करने वाले गुर्जरों ने बड़े पैमाने पर कांग्रेस को इस उम्मीद में वोट दिया था कि सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनेंगे। उस संभावना के धूमिल होने के बाद पांच साल चली खींचतान के बीच अब कांग्रेस गुर्जर नेताओं को नियुक्ति और टिकट देकर साधने की कोशिश कर रही।

BJP को मिल सकता है फायदा

हालांकि चुनाव में दोनों नेता करीब आए हैं। कोई विवाद नहीं होने की बात कह रहे। अब एक फिर कांग्रेस ने पायलट को आगे करते हुए चुनाव में गुर्जरों की नाराजगी दूर कर वोट पाने की रणनीति बनाई है। यह कहना मुश्किल है कि इस बार गुर्जर कांग्रेस पर विश्वास करेंगे या नहीं, क्योंकि गहलोत के पायलट पर दिए गए बयानों से गुर्जर समाज का वोट कांग्रेस को जाएगा, इसको लेकर संशय है। अब समाज ने इसे अंदरखाने वादा खिलाफी बताते हुए कांग्रेस को चुनाव में सबक सिखाने की बात कही है। बीजेपी अब इसका फायदा चुनाव में उठाकर गुर्जर वोट साधने की जुगत लगा रही है। इसका फायदा बीजेपी को मिल भी सकता है।

गुर्जर समाज ने दिए कांग्रेस को 7 विधायक

विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने 12 गुर्जर समाज के प्रत्याशियों को टिकट दिया। 7 प्रत्याशी जीते थे। 2018 चुनाव में गुर्जर समाज से 8 विधायक जीत कर सदन पहुंचे थे। 7 प्रत्याशी कांग्रेस के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे। जोगिंदर सिंह अवाना बीएसपी से जीतकर विधानसभा के सदस्य बने। सभी बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय कर लेने के बाद विधानसभा में 8 गुर्जर समाज के सदस्य हो गए।

गुर्जरों का 12 जिलों में दबदबा

12 जिलों में गुर्जर समाज का प्रभाव है। भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, जयपुर, टोंक, दौसा, कोटा, भीलवाड़ा, बूंदी, अजमेर और झुंझुनू जिलों को गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र है।

2018 में गुर्जरों ने कांग्रेस के लिए की थी एकतरफा वोटिंग

विधानसभा 2018 के चुनाव में 9 गुर्जर प्रत्याशियों को टिकट देने के बावजूद बीजेपी के टिकट पर समाज का एक भी विधायक जीत दर्ज कर विधानसभा नहीं पहुंच पाया। क्योंकि गुर्जर समाज को यही उम्मीद थी कि कांग्रेस जीतती है तो पायलट सीएम बनेंगे। इससे यही साबित होता है कि गुर्जर समाज ने 2018 में पायलट के चेहरे पर कांग्रेस को सपोर्ट किया था ।

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