back to top
23.1 C
New Delhi
Monday, March 16, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

CM नीतीश कुमार की कैबिनेट का बड़ा फैसला! गया का नाम अब ‘गया जी’, जानें इसके पीछे की पौराणिक कहानी

बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी गया को अब एक नया नाम मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि गया शहर का नाम अब 'गया जी' होगा।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी गया को अब एक नया नाम मिला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता मे हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लिया गया कि गया शहर का नाम अब ‘गया जी’ होगा। इस फैसले के पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

क्यों पड़ा नाम ‘गया जी’? जानें पौराणिक कथा

गया शहर को ‘गया जी’ कहे जाने के पीछे एक पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार त्रेता युग में ‘गयासुर’ नाम का एक राक्षस था, जो भगवान विष्णु की सच्चे मन से तपस्या करता था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान मांगने को कहा।

गयासुर ने कहा कि भगवान आप मेरे शरीर में निवास करें, ताकि जो कोई मुझे देखे उसके सारे पाप नष्ट हो जाएं और उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो। इसके बाद गयासुर इतना पुण्यात्मा बन गया कि उसे देखने मात्र से लोगों के कष्ट समाप्त होने लगे। देवताओं को लगा कि सृष्टि का नियम बिगड़ रहा है, क्योंकि सब बिना कर्म किए ही पुण्य लाभ पा रहे थे। तब ब्रह्मा जी गयासुर के पास पहुंचे और बोले कि उन्हें ब्रह्म-यज्ञ करना है और उसके लिए सबसे उत्तम भूमि वही है। गयासुर सहर्ष लेट गया और उसका शरीर पांच कोस तक फैल गया। उसके शरीर पर सभी देवी-देवताओं ने मिलकर यज्ञ किया। लेकिन उसका शरीर स्थिर नहीं हो रहा था, जिससे देवता चिंतित हो गए।

भगवान विष्णु ने की गयासुर की अंतिम इच्छा पूरी

तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उन्हें यज्ञ में शामिल होने के लिए कहा। भगवान विष्णु जैसे ही यज्ञ में शामिल हुए, गयासुर का शरीर स्थिर हो गया। फिर भगवान विष्णु ने गयासुर से अंतिम वरदान मांगने को कहा। गयासुर ने इच्छा जताई कि वह एक पत्थर की शिला में बदल जाए और यही स्थान पितरों के श्राद्ध और तर्पण का पवित्र स्थल बन जाए। साथ ही भगवान विष्णु सहित सभी देवता अप्रत्यक्ष रूप से वहीं विराजमान रहें।

आज भी किया जाता है श्राद्ध और तर्पण

भगवान विष्णु ने उसकी इस भावना को स्वीकार किया और तब से गया में पितरों के श्राद्ध और तर्पण की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि यहां किए गए श्राद्ध से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। सरकार का मानना है कि नाम परिवर्तन से लोगों की आस्था को और बल मिलेगा और गया का धार्मिक महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ेगा। यह नाम न केवल संस्कृति से जुड़ा है, बल्कि एक महान बलिदान की याद भी दिलाता है। गया अब ‘गया जी’ बन चुका है – एक ऐसा नाम जो श्रद्धा, परंपरा और मोक्ष की भावना से जुड़ा है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।

Advertisementspot_img

Also Read:

बिहार में नई हलचल तेज! बंद कमरे में युवा विधायकों के साथ खास बैठक, जानिए क्या प्लान बना रहे हैं निशांत कुमार

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया नाम तेजी से चर्चा में है Nishant Kumar। Nitish Kumar के बेटे निशांत...
spot_img

Latest Stories

प्रहार नाम का मतलब – Prahar Name Meaning

Prahar Name Meaning – प्रहार नाम का मतलब :Attack/वार,...

सैलरी तो बढ़ी लेकिन जेब है खाली…जानिए क्या है लाइफस्टाइल इंफ्लेशन और इससे बचाव के तरीके

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पैसा किसे प्यारा नहीं होता? लोग...

West Bengal Assembly 2026: बिधाननगर सीट पर किसका रहा है पलड़ा भारी, जानिए यहां का सियासी इतिहास

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव मुहाने...

जब देश में है तेल के कुएं का भंडार तो भारत विदेशों से क्यों खरीदता है क्रूड ऑयल?

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इस बात में कोई दोराहे नहीं...

LPG, CNG और PNG में क्या होता है अंतर? जानिए रसोई से गाड़ियों तक इन गैसों का काम

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर Iran...

Solo घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहां मिलेगा सुकून

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज के समय में ज्यादातर...