नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से NDA के साथ हैं और बार-बार यह सफाई दे रहे हैं कि अब वे किसी भी हाल में गठबंधन नहीं बदलेंगे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंच से कहा कि पहले दो बार गलती से महागठबंधन में चले गए थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रविवार को खेलो इंडिया के उद्घाटन पर भी उन्होंने दोहराया “मैं हमेशा यहीं (एनडीए में) रहूंगा।”
बीजेपी को जताया एहसान
नीतीश कुमार ने यह भी साफ किया कि उन्हें सबसे पहले मुख्यमंत्री बनाने का फैसला स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। यानी वह बीजेपी के प्रति अपनी वफादारी और कर्ज चुकाने की बात कह रहे हैं। वह अब बीजेपी को पूरा श्रेय दे रहे हैं और साफ कर रहे हैं कि अगली सरकार बनने पर नेतृत्व बीजेपी ही तय करेगी।
CM पद को लेकर संदेह क्यों?
नीतीश कुमार की सफाई इसलिए भी जरूरी हो गई है क्योंकि भाजपा की तरफ से यह साफ नहीं किया गया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन सीएम का फैसला बाद में होगा। ऐसे बयान संदेह को और हवा देते हैं। हाल के दिनों में नीतीश कुमार की चुप्पी और कुछ असामान्य हाव-भाव वाली तस्वीरों ने अफवाहों को जन्म दे दिया था कि वे नाराज हैं या बीमार हैं। कुछ विरोधियों ने तो उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल भी उठा दिए। हालांकि नीतीश कुमार ने अब फिर से सक्रिय होकर सभी चर्चाओं को शांत करने की कोशिश की है।
नीतीश क्या सच में बीमार हैं?
नीतीश कुमार 20 साल से ज्यादा वक्त से सीएम पद पर हैं और अब उम्र के हिसाब से रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे फैसले लेने की स्थिति में नहीं हैं। वे पूरी तरह होश में हैं और अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी की तैयारी में जुटे हैं। नीतीश कुमार अब दो बड़े काम निपटाना चाहते हैं— बेटे निशांत की शादी और राजनीति में एंट्री। खबर है कि निशांत जेडीयू में बड़ी भूमिका पा सकते हैं, मंत्री भी बन सकते हैं, और विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान भी चलाएंगे। इससे जनता में सहानुभूति और पार्टी में नई लीडरशिप तैयार करने की कोशिश साफ दिख रही है। नीतीश कुमार के बाद जेडीयू के पास कोई दूसरा बड़ा नेता नहीं है। ऐसे में निशांत कुमार को आगे लाकर पार्टी एक नई शुरुआत करना चाहती है। अगर लोग नीतीश के विकास कार्यों को याद रखते हुए निशांत को समर्थन दें, तो जेडीयू को नया चेहरा भी मिल जाएगा और सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने का मौका भी।




