नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के बाद महाराष्ट्र में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे एकनाथ शिंदे अब उपमुख्यमंत्री बन गये हैं और मुख्यमंत्री का पद बीजेपी के देवेन्द्र फडणवीस के पास चला गया। महाराष्ट्र में महायुति की शानदार जीत के बावजूद एकनाथ शिंदे की मजबूरी उनके लिए हार थी। गौरतलब है कि 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर दी थी और उद्धव ठाकरे से सब कुछ छीन लिया था। पार्टी, चुनाव चिन्ह सब कुछ एकनाथ शिंदे के पास चला गया। इसके साथ ही शिवसेना पार्टी की संपत्ति भी उनके हाथ आ गई। अब जब 2024 के नतीजों के बाद सब कुछ बदल गया है तो एकनाथ शिंदे का मूड भी बदल रहा है जो बीजेपी के लिए खतरे का संकेत है।
पार्टी की चल-अचल संपत्ति को लेकर खींचतान
मुख्यमंत्री बनने की चाहत लेकर महायुति में शामिल हुए एकनाथ शिंदे को जब से झटका लगा है, तब से उनका मन डांवाडोल नजर आ रहा है। अब ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले दिनों में वह पार्टी का चुनाव चिन्ह भी लौटा दें, या फिर वह उद्धव ठाकरे से सुलह कर दोबारा पार्टी में शामिल हो सकते हैं। एकनाथ शिंदे ने बीजेपी में शामिल होकर महायुति गठबंधन के आधार पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना सरकार, पार्टी, चुनाव चिह्न छीन लिया, जिसके चलते उन्होंने दो साल में अपनी पार्टी मजबूत कर ली, लेकिन अब वह बीजेपी के पाले में आ गए हैं, लेकिन, एकनाथ शिंदे के पास अभी भी कुछ ऐसा है जो बीजेपी के पास नहीं है और वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। पार्टी की चल-अचल संपत्ति को लेकर उद्धव गुट और शिंदे गुट के बीच खींचतान चल रही थी। इस मामले में एकनाथ शिंदे ने बड़ा फैसला लिया है।
पार्टी के मालिकाना हक की लड़ाई खत्म
पार्टी टूटने के बाद शिवसेना का बैंक खाता भी शिंदे के पास आ गया, लेकिन शिंदे ने फैसला किया है कि वह ये पैसे उद्धव ठाकरे को लौटा देंगे। यूबीटी को राहत देते हुए शिंदे ने 2022 से पहले शिवसेना के बैंक खाते में जमा पैसे पर दावा नहीं करने का फैसला किया है। इससे शिवसेना की संपत्तियों और बैंक खातों पर मालिकाना हक की लड़ाई खत्म हो जाएगी। बैंक खाते में कितना पैसा जमा हुआ, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दावा किया गया कि 2023 में शिवसेना के बैंक खाते में 190 करोड़ रुपये जमा हुए। अब संभव है कि अगर खाते से पैसे नहीं निकाले गए होते तो ब्याज के साथ यह रकम 200 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 में शिवसेना के पास कुल 191 करोड़ की चल-अचल संपत्ति थी। आज भी दादर और उसके सामने उद्धव ठाकरे का शिवसेना भवन है। इसके अलावा शिवसेना महाराष्ट्र में 82 बड़े कार्यालय और मुंबई में 227 छोटे कार्यालय चलाती है। शिव सेना का मुख्यालय दादर में है। समाना पत्रिका समेत यह संपत्ति एक ट्रस्ट द्वारा संचालित है। जिसमें उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मी ठाकरे, अरविंद सावंत आदि कार्यकारिणी सदस्य हैं।




