नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद के मानसून सत्र में सोमवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर जोरदार चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि यह कहना गलत है कि ऑपरेशन को किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में रोका गया। उन्होंने दो टूक कहा- “हमने आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारा और अपनी मां-बहनों के सिंदूर का बदला लिया।
पहलगाम हमला अमानवीयता की हद: धर्म पूछकर मारे गए लोग
राजनाथ सिंह ने संसद में बताया कि कश्मीर के पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ, वह अमानवीयता की हद थी। वहां लोगों को धर्म पूछकर मारा गया, जो मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक की और सेना को पूरी छूट दी गई। इसके बाद भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात 22 मिनट के अंदर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया, जिसमें 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी, उनके प्रशिक्षक और संचालक मारे गए।
सेना का साहसिक और ठोस जवाब: पाकिस्तान कोई टार्गेट हिट नहीं कर पाया
राजनाथ सिंह ने साफ किया कि पाकिस्तान ने जवाबी हमले की कोशिश की, लेकिन हमारा डिफेंस सिस्टम इतना मजबूत था कि पाकिस्तान एक भी टार्गेट को हिट नहीं कर सका। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने 7 से 10 मई तक मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों से हमला किया, लेकिन भारत ने हर हमले को नाकाम कर दिया।
राजनीति नहीं, सेना का मनोबल बढ़ाना चाहिए: विपक्ष पर निशाना
रक्षा मंत्री ने विपक्ष के सवालों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा यह पूछता है कि हमारे कितने विमान गिरे, लेकिन यह नहीं पूछता कि हमने दुश्मन के कितने विमान गिराए। उन्होंने कहा, “परिणाम मायने रखता है। जब बच्चा एग्जाम में पास होता है, तो यह नहीं पूछा जाता कि उसकी पेंसिल टूटी थी या नहीं।अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने कहा कि राजनीति में वह कभी शत्रुता नहीं लाते और विपक्ष में रहते हुए भी हमेशा देशहित को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना के पराक्रम और भारत सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में जो माहौल बना, उसमें एक बात स्पष्ट थी भारत आतंकवाद के खिलाफ अब चुप नहीं बैठेगा। राजनाथ सिंह का यह बयान कि “यह सिंदूर की लाली शौर्य की कहानी है”, पूरे देश की भावनाओं को दर्शाता है। ऑपरेशन के जरिए भारत ने दिखा दिया कि वह न केवल सहन करना जानता है, बल्कि जवाब देना भी।




