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Friday, March 13, 2026
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महिलाओं पर दिए गए विवादित बयान पर संत प्रेमानंद महाराज की प्रतिक्रिया, कहा- सही बात हमेशा बुरी लगती है

संत प्रेमानंद महाराज अपने एक विवादित बयान की वजह से चर्चा में आ गए हैं। उन्‍हें अपने बयान के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अब उन्‍होंने अपने बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । महिलाओं के खिलाफ एक विवादित बयान देने के बाद संत प्रेमानंद महाराज सुर्खियों में हैं। उन्‍हें अपने बयान के कारण विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। महिलाएं भी उनके बयान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। अब, संत प्रेमानंद महाराज ने अपने बयान पर पलटवार करते हुए यूट्यूब चैनल पर एक उपदेश दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि “अगर किसी को सही बात समझाई जाए, तो वह उसे बुरी लगेगी।” संत ने यह भी कहा कि सही मार्ग को अपनाने के लिए कभी-कभी कठोर शब्दों की आवश्यकता होती है, लेकिन यह भलाई के लिए होते हैं।

विवादित बयान पर बोले संत प्रेमानंद महाराज 

महिलाओं पर विवादित बयान देने के बाद आलोचनाओं से घिरे संत प्रेमानंद महाराज ने अब अपनी प्रतिक्रिया दी है। अपने यूट्यूब प्रवचन में उन्होंने कहा कि “आज लोगों की बुद्धि केवल भौतिक जगत को देखने में लगी है। अध्यात्म का मार्ग समझने वाला कोई बिरला ही होता है।” अपनी बात को जोर देकर समझाते हुए उन्होंने कहा “नाली का कीड़ा नाली में ही सुख अनुभव करता है। उसे अमृतकुंड में डाल दो, तो भी उसे अच्छा नहीं लगेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “गंदे आचरण करने वालों को अगर कोई सही बात समझाएगा, तो वो बुरा ही लगेगा। तुम सब बच्चे हो। जब आप सुधरने आए हो, तो अगर हम कड़वी बात भी कहें, तो उसे सहन करना पड़ेगा। लेकिन यही सच है कि सही उपदेश अक्सर बुरा लगता है।”

प्रेमानंद महाराज की नसीहत

अपने हालिया उपदेश में संत प्रेमानंद महाराज ने युवाओं को लेकर कई नसीहतें दीं। उन्होंने कहा “बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बनाना बंद करो, नशा मत करो और माता-पिता की आज्ञा में रहो। अगर ऐसी बातों को भी बुरा मानोगे, तो संत उपदेश देना ही छोड़ देंगे। फिर कैसे जानोगे कि अच्छा क्या है और बुरा क्या?” 

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि आज की पीढ़ी सुख की तलाश में व्यसन और गलत व्यवहार की ओर बढ़ रही है, जो अंत में डिप्रेशन और अपराध की राह पर ले जाता है। उन्‍होंने कहा कि “नए बच्चे हो, संसार में आए हो, तुम्हें सुख चाहिए, लेकिन अगर वह सुख व्यसन, व्यभिचार और गंदे आचरण में ढूंढ़ोगे, तो वही तुम्हें डिप्रेशन, अपराध और अंततः जेल तक ले जाएगा।” उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति संतों, सतगुरुओं और शास्त्रों की बातों का मनन करता है, तो उसे माया का अस्तित्व ही महसूस नहीं होगा।

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