नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। साल 1999 में भारतीय सेना को कारगिल युद्ध का सबसे पहले अलर्ट देने वाले ताशी नामग्याल का लद्दाख में निधन हो गया। उन्होंने 58 वर्ष की उम्र में लद्दाख में 20 दिसंबर 2024 को अंतिम सांस ली। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताशी नामग्याल ने 25वें कारगिल विजय दिवस में अपनी टीचर बेटी सेरिंग डोलकर के साथ शिरकत की थी।
ताशी नामग्याल लद्दाख में एक चरवाहे थे
ताशी नामग्याल लद्दाख के निवासी थे। वह लद्दाख में एक चरवाहे थे। ताशी नामग्याल ने मई 1999 में अपने लापता याकों को ढूंढने के दौरान देखा कि पाकिस्तानी सेना के जवान बटालिक पर्वत श्रृंखला के ऊपर बंकर खोद रहे थे। जिसके बाद उन्होंने देश की सेवा के लिए एक बड़ा कदम उठाया और तुरंत भारतीय सेना को इसको सूचना दी। ताशी नामग्याल भारतीय सेना को कारगिल युद्ध की जानकारी देने वाले पहले व्यक्ति थे।
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने ताशी नामग्याल को श्रद्धांजलि अर्पित की
ताशी नामग्याल का लद्दाख की आर्यन घाटी में निधन हो गया। लेह स्थित फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले ताशी नामग्याल को श्रद्धांजलि दी। फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर ताशी नामग्याल के आकस्मिक निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने की जानकारी पोस्ट की है। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा है कि “फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स श्री ताशी नामग्याल के आकस्मिक निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है। ऑपरेशन विजय 1999 के दौरान राष्ट्र के लिए उनका अमूल्य योगदान स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। दुख की इस घड़ी में हम शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।”
ताशी नामग्याल को एक वीर चरवाहे के रूप में मान्यता मिली
ताशी नामग्याल को वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी घुसपैठ के बारे में भारतीय सेना को सर्तक करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सम्मानित भी किया गया था। यह कारगिल युद्ध 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चला था, जिसमे भारतीय जवानों ने पाकिस्तान सैनिको के छक्के छुड़ा दिए थे और इस युद्ध में बड़ी जीत हासिल की थी। इसमें ताशी नामग्याल की सर्तकता ने भारत को बड़ी जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद से ताशी नामग्याल को एक वीर चरवाहे के रूप में मान्यता मिली।




