back to top
17.1 C
New Delhi
Friday, March 20, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

V.P Singh Death Anniversary: वादा पूरा करने के लिए CM पद छोड़ने का साहस दिखाया, ये ऐतिहासिक निर्णय लिए

V.P Singh देश के वो नेता है जिन्होंने एक वादा पूरा करने के लिए CM पद से स्तिफा दे दिया था। उन्होंने कई बड़े ऐतिहासिक निर्णय लिए। OBC आरक्षण में अपना योगदान भी दिया।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। विश्वनाथ प्रताप सिंह (V.P Singh) एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के 8वें प्रधानमंत्री रहे। उनकी राजनीति में कई विवाद थे लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी नीतियों और फैसलों में बदलाव लाने की कोशिश की। आज वीपी सिंह की पूर्णतीथि हैं। वीपी सिंह का जन्म 25 जून 1931 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। वीपी सिंह जनता दल पार्टी के सदस्दय थे। 2008 में 77 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया।  

ऐसा रहा राजनीतिक सफर

वीपी सिंह का राजनीतिक सफर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुआ था जहां वे छात्र संघ के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होंने विधायक यूपी के मुख्यमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में थी जो सत्ताधारी पार्टी की नीतियों से असहमत थे और बदलाव की कोशिश करते थे।

मंडल कमीशन और OBC आरक्षण

1980 में मंडल आयोग की रिपोर्ट तैयार हुई जो OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सिफारिश करती थी। वीपी सिंह ने 1990 में प्रधानमंत्री बनते ही इसे लागू किया। इस फैसले ने लाखों OBC युवाओं का जीवन बदल दिया लेकिन इससे कुछ वर्ग नाराज हो गए खासकर सवर्ण वर्ग। इसके बाद वीपी सिंह की लोकप्रियता में उथल-पुथल आ गई लेकिन उन्होंने इसे लेकर कभी पछतावा नहीं किया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष

वीपी सिंह ने अपने समय में बोफोर्स घोटाले और पनडुब्बी सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों का पर्दाफाश किया। उन्होंने इसे राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बनाया और कांग्रेस सरकार के खिलाफ संघर्ष किया। इस मुद्दे के कारण 1989 के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और वीपी सिंह ने राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार बनाई।

सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष

वीपी सिंह ने हमेशा सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ आवाज उठाई। जब बीजेपी ने राम मंदिर आंदोलन शुरू किया तब उन्होंने इसे सामाजिक और सांप्रदायिक उन्माद मानते हुए उसका विरोध किया।

कुर्सी छोड़ने का साहस

वीपी सिंह ने हमेशा अपने वादों पर खरा उतरने की कोशिश की। जब उन्होंने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में डाकुओं के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया और जब उनकी खुद की परिवारिक त्रासदी हुई तो उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह उदाहरण उनकी ईमानदारी का प्रतीक बना।

समाप्ति और विरासत

वीपी सिंह का निधन 27 नवंबर 2008 को हुआ। हालांकि उन्हें बाद में मीडिया और समाज से बहुत सम्मान नहीं मिला लेकिन उन्होंने भारतीय समाज में पिछड़ों को आरक्षण देने का ऐतिहासिक कदम उठाया जिसे कभी नकारा नहीं जा सकता।

Advertisementspot_img

Also Read:

छुट्टी रद्द होते ही GenZ कर्मचारी का अनोखा रिएक्शन, एयरपोर्ट से बोलीं- अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । सोचिए, आप फ्लाइट पकड़ने ही वाले हों और तभी ऑफिस से मैसेज आए कि आपकी छुट्टियां रद्द कर दी गई...
spot_img

Latest Stories

Alka Yagnik Birthday: मां के इस फैसले ने बना दिया सुपरस्टार, बदल गई किस्मत

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। गायिका अलका याग्निक (Alka Yagnik)...

Shukrwar Mantra: इन मंत्रों के जाप से प्रसन्न हो जाती हैं माता लक्ष्मी, जीवन भर नहीं होती धन की कमी

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी...