नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागीय लेख अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश दिए हुए हैं कि जब तक वे अपनी संपतियों का ब्यौरा नहीं दे देते हैं। तब तक उनका वेतन नहीं दिया जाएगा। योगी आदित्यनाथ के इस निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश के कार्मिक विभाग ने इन कर्मचारियों का वेतन रोकने का आदेश दे दिया है, जिससे उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में हडकंप मच गया है।
32,624 राज्य कर्मियों का सितंबर महीने का वेतन रोक दिया गया है
योगी सरकार ने दिवाली से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए संपति का ब्यौरा न देने वाले 32,624 राज्य कर्मियों का सितंबर महीने का वेतन रोक दिया है। ये राज्य के वो सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्होंने योगी सरकार के आदेश के बाद भी अपनी संपति का ब्यौरा नहीं दिया था। उत्तर प्रदेश के विभागीय लेख अधिकारियों ने सितंबर महीने का वेतन जारी नहीं होने के बाद, गुहार लगाई है कि उन्हें कुछ समय और दे दिया जाए, वे जल्द ही अपनी संपति का ब्यौरा दे देंगे।
अप्रैल में ऑनलाइन संपत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया
योगी सरकार ने राज्य में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए IAS और PCS अधिकारियों की तरह उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए भी संपतियों के ब्योरे देने को अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार के निर्देश के बाद पहले चरण में मानव सम्पदा पोर्टल पर सभी सरकारी कर्मचारियों के पूरे ब्योरे को फीड किया गया था। इसके बाद अप्रैल 2024 में इसी पोर्टल पर सभी कर्मचारियों को ऑनलाइन संपत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया।
निर्देशों का पालन न करने को लेकर रिपोर्ट भी मांगी है
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को अगस्त 2024 तक अपनी संपति का ब्यौरा देने का मौका दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश के कार्मिक विभाग ने इसको लेकर एक सख्त आदेश जारी किया था कि अगर राज्य कर्मी 30 सितंबर 2024 तक अपनी संपतियों का ब्यौरा देने में असफल रहे तो उनके वेतन को रोक दिया जाएगा। कार्मिक विभाग के इस आदेश के बाद राज्य के कुल 8,25,967 कर्मचारियों में से 30 सितंबर 2024 तक 7,93,343 कर्मचारियों ने ही अपनी संपति का ब्यौरा दिया। जिसके बाद कार्मिक विभाग ने संपति का ब्यौरा न देने वाले कर्मचारियों का सितंबर महीने का वेतन रोक दिया है। इसके साथ ही कार्मिक विभाग ने इन कर्मचारियों से निर्देशों का पालन न करने को लेकर रिपोर्ट भी मांगी है।





