नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में अब विवाह प्रमाण पत्र बनवाने के जमा होने वाले अनेक दस्तावेजों के साथ दहेज का ब्यौरा भी देना होगा। इसको लेकर विभाग को नोटिस जारी कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, विवाह प्रमाण पत्र बनाने के लिए रोज हजारों की तादाद में आवेदन प्राप्त होते हैं। विवाह प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नियमों के मुताबिक, वर-वधु पक्ष की ओर से विवाह का कार्ड, आधार कार्ड, हाई स्कूल की मार्कशीट के साथ दो गवाहों के दस्तावेज मांगे जाते हैं।
विवाह प्रमाण पत्र के लिए दहेज शपथ पत्र जरूरी
विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए अब पहले से अनिवार्य दस्तावेजों के साथ दहेज के शपथ पत्र को भी जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस जानकारी के संबंध में कार्यलय को नोटिस जारी कर दिया गया है। इस दहेज शपथ पत्र में शादी में दिए गए दहेज का ब्याौरा देना होगा। अधिकारी दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि शासन की ओर से विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए शपथ पत्र अनिवार्य किया गया है। साथ ही सभी को यह निर्देश दिया गया है कि विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के पहले दहेज शपथ पत्र को भी जरूर मांगे।
कहां काम आता है विवाह प्रमाण पत्र?
शादी के बाद ज्वाइंट बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए इस प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है। साथ ही पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय भी महिला को पति के नाम को दिखाने के लिए इस प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है। साथ ही शादी के बाद बीमा करवाने के लिए भी प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ती है। अगर दंपति ट्रैवल वीजा या किसी देश में स्थायी निवास के लिए आवेदन करना चाहते हैं, तो प्रमाण पत्र लगाना जरूरी हो जाता है। अगर महिला शादी के बाद सरनेम नहीं बदलना चाहती, तो ऐसे में मैरिज सर्टिफिकेट के बगैर सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है। इसके अलावा किसी भी राष्ट्रीय बैंक से ऋण लेने के लिए शादी का प्रमाण पत्र लगाना आवश्यक है। इसके अलावा किसी भी कानूनी मामले में शादी का प्रमाण पत्र भी जरूरी हो जाता है। कानूनी मामलों में वो मामले शामिल है जो फैमिलि कोर्ट में चलते है, खासतौर से पति-पत्नी के बीच। अगर कोई तलाक भी लेना चाहता है तो उसको खुद को शादीशुदा दिखाना होगा, जिसके लिए शादी का प्रमाण पत्र जरूरी है।
कितने दिन के अंदर कर सकते हैं प्रमाण पत्र के लिए अप्लाई?
दंपति को शादी के 30 दिन के भीतर शादी को रजिस्टर करवाना होना है। लेकिन अतिरिक्त फीस देकर दंपति 5 वर्ष तक मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन अगर शादी को 5 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है तो ऐसे मामलों में मैरिज रजिस्ट्रेशन की छूट संबंधित जिला रजिस्ट्रार ही दे सकता है।
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