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Saturday, March 21, 2026
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70 घंटे काम का राग नारायण मूर्ति ने फिर छेड़ा, चीन के 9-9-6 का दिया सक्सेस फॉर्मूला, कहा-भारत की रफ्तार…

एक बार फिर इंफोसिस के संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति ने अपने पुराने बयान को ताजा करते हुए भारत की आर्थिक रफ्तार बढ़ाने के लिए युवाओं को वर्क-लाइफ बैलेंस की सलाह दी है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंफोसिस के संस्थापक और देश के जाने-माने उद्योगपतियों में शामिल एन. आर. नारायण मूर्ति ने भारतीय युवाओं को फिर एक बार कड़ी मेहनत और लंबे समय तक काम करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत की आर्थिक गति को चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के स्तर तक लाना है, तो युवाओं को पहले अपने करियर और देश की प्रगति पर ध्यान देना होगा, और वर्क-लाइफ बैलेंस की चिंता बाद में करनी चाहिए।

70 घंटे काम करने की वकालत, चीन का 9-9-6 मॉडल उदाहरण

नारायण मूर्ति ने अपने पुराने विवादास्पद बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सप्ताह में 70 घंटे काम करना देश निर्माण और व्यक्तिगत करियर के लिए जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने चीन की कार्य संस्कृति का उदाहरण दिया, जहां बड़ी कंपनियों में ‘9-9-6 मॉडल’ अपनाया जाता है।

इस मॉडल के अनुसार कर्मचारी सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, सप्ताह में 6 दिन काम करते हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 72 घंटे प्रति सप्ताह। अलीबाबा और हुवावे जैसी कंपनियों में यह मॉडल लंबे समय तक लागू रहा और इसे वहां के कुछ उद्यमियों ने सफलता का सूत्र बताया।

आलोचना और कानूनी स्थिति

हालांकि इस मॉडल को वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी और कर्मचारियों में थकान (burnout) के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा। 2021 में चीन के सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध घोषित कर दिया। बावजूद इसके, कई टेक कंपनियों में यह अब भी लागू माना जाता है।

भारत और चीन की तुलना

नारायण मूर्ति ने कहा कि भारत की वर्तमान आर्थिक वृद्धि दर लगभग 6.5 प्रतिशत है, जो ठीक है, लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था भारत से लगभग छह गुना बड़ी है। इस अंतर को कम करने के लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी और युवाओं की मेहनत आवश्यक है।

नारायण मूर्ति ने स्पष्ट किया कि युवाओं को पहले अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए, देश की प्रगति में योगदान करना चाहिए, और वर्क-लाइफ बैलेंस की चिंता बाद में कर सकते हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि राष्ट्र निर्माण और व्यक्तिगत सफलता के लिए कड़ी मेहनत और लंबे समय तक काम करना एक अहम तत्व है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नारायण मूर्ति का यह बयान युवाओं को प्रेरित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन भारत में कार्य संस्कृति को चीन की तरह अत्यधिक श्रमसाध्य बनाने से सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए लंबे समय तक काम करने की प्रेरणा देने के साथ-साथ संतुलित कार्य वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है।

एन. आर. नारायण मूर्ति ने इस बयान के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि देश की आर्थिक प्रगति और व्यक्तिगत करियर की सफलता में कड़ी मेहनत और समर्पण का अहम रोल है। चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को यह समझाने की कोशिश की है कि तेज़ प्रगति के लिए लंबे समय तक काम करना और लक्ष्य पर फोकस करना आवश्यक है।

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