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Tuesday, March 17, 2026
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Delhi News: अनंत अंबानी को दिल्ली हाई कोर्ट का ‘तोहफा’, तय स्थान पर ही होगी शादी

Anant Ambani: दिल्ली हाई कोर्ट ने कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस ग्रीन्स में आयोजित करने से रोकने की मांग खारिज कर दिया।

नई दिल्ली, (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने कारोबारी मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस ग्रीन्स में आयोजित करने से रोकने की मांग खारिज कर दिया। जस्टिस सुरेश कुमार कैत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की पशु-पक्षियों को नुकसान पहुंचने की आशंका मात्र है। ऐसे में आशंका के आधार पर कोई भी निरोधात्मक आदेश जारी नहीं किया जा सकता है।

यह याचिका वकील राहुल नरुला ने दायर की थी

यह याचिका वकील राहुल नरुला ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी का कार्ड वायरल हो रहा है। शादी के कार्ड के मुताबिक ये शादी जामनगर स्थित रिलायंस ग्रीन्स में 1 मार्च से 3 मार्च तक आयोजित की जाएगी। याचिका में कहा गया था कि रिलायंस का रिलायंस ग्रीन्स स्थित जू और राधे कृष्णा टेंपल एलिफैंट ट्रस्ट पर सीधा नियंत्रण है, क्योंकि वो रिलायंस की संपत्ति पर स्थित है। इस शादी के आयोजन के दौरान जू और एलिफैंट ट्रस्ट के पशु-पक्षियों और हाथियों के इस्तेमाल से उन्हें खासा नुकसान होगा जो प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स के प्रावधानों का उल्लंघन होगा।

याचिकाकर्ता ने आशंका के आधार पर याचिका दायर की है

सुनवाई के दौरान जू और ट्रस्ट की ओर से पेश वकील ने कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने आशंका के आधार पर याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की ये आशंका निर्मूल है कि जू और एलिफैंट ट्रस्ट के पशु-पक्षियों और हाथियों का शादी समारोह के दौरान इस्तेमाल किया जाएगा। उनकी इस दलील के बाद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया।

यह हमारे कानून व्यवस्था की खासियत है, जो सत्य की तह तक जाकर ही न्याय करती है। हर भारतीय को अधिकार है कि वह जनहित याचिका को कोर्ट में फाइल सकता है। इसमें भी याचिकाकर्ता को बहुत ही सोच विचार के साथ जनहित याचिका को कोर्ट में फाइल करना चाहिए। अगर याचिका वाक्य में जनहित के उदेश्य से हो तो ही उसे कोर्ट में फाइल करने चाहिए। हमारे देश में बहुत से केस जजों की कमियों के कारण पेंडिंग रहते हैं। इसलिए एक जागरूक नागरिक होने के नाते सोच विचार कर ही अपने इस अधिकार का प्रयोग करना चाहिए।

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