नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। दिवाली का पर्व बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। घर को रोशनी से रोशन करने के लिए दीप जलाते हैं। ऐसी मान्यता है की आज के दिन ही भगवान राम माता सीता और भाई लक्षमण के साथ 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या आए थे। लेकिन हर दिवाली को माता लक्ष्मी की पूजा पूजा होती हैं।अब सवाल ये उठता हैं कि, जब ये उत्सव भगवान राम के आगमन का हैं तो माता माता लक्ष्मी की पूजा क्यों? तो चलिए जानते हैं इसका महत्त्व।
राम भगवान का हुआ था आगमान
दिवाली के दिन होने वाली पूजा के कई महत्व है। शास्त्रों के अनुसार दिवाली का पर्व भगवान राम के अयोध्या आने के उपलक्ष्य में मनाई जाती हैं। कहते हैं कि, 14 साल वनवास काट कर भगवन जब अपने घर आए। तो अयोध्या वासी काफी खुश हो गए और चारो तरफ दीपक जलाकर पूरी अयोध्या नगरी रोशन कर दी थी। उसी दिन के बाद हर साल दिवाली का पर्व मनाया जाने लगा।
दिवाली के दिन क्यों होती है लक्ष्मी माता की पूजा
दिवाली के दिन सभी कोई दीपक जलाने के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा मन जाना हैं कि आज के दिन माता की पूजा करने से घर में बरकत होती है। इसके साथ ही माता का आशीवार्द प्राप्त होता हैं इससे आपको धन लाभ भी होता हैं। मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो इसमें से लक्ष्मी भी निकली थी। ये मान्यता है कि जिस दिन लक्ष्मी प्रकट हुईं थी, उस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी। यह दिन ही दिवाली के तौर पर मनाया जाता है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा के बारे में कई और कहानियां भी है। कुछ लोगों का ये भी मानना हैं कि दिवाली के दिन कई राक्षसों का अंत हुआ था जिसमें नार्कासुर, बली आदि शामिल है। इसलिए दिवाली को अच्छा संकेत माना जाता है और समृद्धि के देवी यानी लक्ष्मी को पूजा जाता है।
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